US-Israel-Iran Conflict: इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष मे इजरायल की तरफ से ईरान के खिलाफ जंग में शामिल होने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दो हफ्ते का इंतजार करने की बात कही। लेकिन 36 घंटे बाद अमेरिका ने अचानक ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला कर दिया। ये अटैक ईरान के तीन परमाणु ठिकानों को निशाना बनाकर की गई । अटैक में ईरान काफी परमाणु क्षति हुई है। इसमें फोर्दो स्थित परमाणु ठिकाना पूरी तरह से नष्ट हो गया। ये घटनाक्रम उस वक्त सामने आया, जब ट्रंप ने एक ओर कूटनीतिक वार्ता और शान्ति के संकेत दिए थे। और अचानक ईरान पर हमला करा दिया । ये स्पष्ट है कि अमेरिका की सैन्य रणनीति पहले से तैयार चल रही थी।
ट्रंप ने ईरान पर अटैक को कैसे दिया अंजाम
आपको मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बता दे वाशिंगटन पोस्ट की खबर के अनुसार , डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर कोई भी फैसला लेने के दो हफ्ते का समय लेने की बात की थी। हालांकि अमेरिका में हमले की योजना पहले से तैयार कर चुका था। व्हाइट हाउस में इसकी जानकारी किसी को नही थी। हमले को18 घंटे में अंजाम दिया गया जो ये बताता है कि हमले की योजना पहले से थी, भले ही ट्रंप ने दो हफ्ते के इंतजार का ऐलान किया हो.
ट्रंप की कूटनीति चाल
अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ट्रंप का दो हफ्ते वाला बयान ईरान को चकमा देने के लिए दिया था, ताकि वह अपनी सुरक्षा को लेकर सजग न हो जाए ट्रंप के इस बयान का असल उद्देश्य ईरान को किसी हमले से बेखबर रखना था। अधिकारी के मुताबिक, ट्रंप एक हफ्ते से वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों से पूछ रहे थे कि ईरान पर हमला कैसे कराया जाए और कैसे बिना सैनिक उतारे ईरान पर हमला किया जा सकता है। उन्होने कहा कि ऐसा कोई तरीका बताओ जिससे अमेरिका युद्ध में सीधे शामिल हुए बिना ईरान पर हमला कर सके । जब ट्रंप लगातार कूटनीतिक और शान्ति को लेकर बात कर रहे थे तो वहीं दूसरी ओर कूटनीतिक वार्ता की वकालत भी कर रहे थे। इस दोहरे रवैये का मुख्य उद्देश्य यह था कि वह असल में अपने प्लान के बारे में किसी को बताना नही चाहते थे। जैसे ही हमला हुआ, अमेरिका ने इसकी जानकारी दुनिया को दी, जबकि पहले तक इसकी जानकारी किसी को नहीं थी।