
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर से उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग-उन से मिलने को इच्छुक हैं। एयरफोर्स वन विमान में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि 'मैं 100 फीसदी तैयार हूं। हम दोनों की समझ बेहतर है। अगर मौका मिला तो वे उनसे मिलने लिए तैयार हैं।' इस पर सवाल ये उठते हैं कि वे अचानक ऐसा क्यों कर रहे हैं, जबकि कुछ वर्ष पहले यह रिश्ता ठंडा पड़ा गया था। क्या नई कूटनीतिक शांति स्थापित करने के लिए है या रूस और चीन को ताकत दिखाने का संकेत है।
ट्रंप ने अपने कार्यकाल के दौरान पहले भी किम जोंग से मुलाकात की थी। इससे पहले किम जोंग उन से वे तीन बार मुलाकात कर चुके हैं। पहली बार सिंगापुर में 2018 में, दूसरी बार वियतनाम (2019) में और तीसरी बार डीएमजी (कोरियाई सीमा पर) मिल चुके हैं।
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बातचीत का सिलसिला ठप पड़ गया
इन मुलाकातों से उम्मीद थी कि कोरियाई प्रायद्वीप से परमाणु संकट कम होगा। मगर असल समझौता नहीं हो सका। ट्रंप की सरकार गिर गई। इसके बाद बातचीत का सिलसिला ठप पड़ गया। उत्तर कोरिया ने अपने न्यूक्लियर और मिसाइल परीक्षणों को दोबारा से तेज किया। अब हालात पूरी तरह से बदल चुके हैं। दक्षिण कोरिया में नई सरकार संवाद के पक्ष में है। वहीं उत्तर कोरिया रूस और चीन के काफी करीब पहुंच चुका है। ऐसे समय में ट्रंप दोबारा से मुलाकात का सिलसिला शुरू करना चाहते हैं।
डिप्लोमेसी के जरिए बड़े संकट को टाल सकते हैं
किम से मिलकर ट्रंप दोबारा से बातचीत शुरू करना चाहते हैं। वे दुनिया को दिखाना चाहते हैं कि डिप्लोमेसी के जरिए वह बड़े संकट को टाल सकते हैं। राजनीतिक रूप से मुलाकात उन्हें शांति दूत के रूप में स्थापित करता है। भले ही इसके ठोस परिणाम न हों।
क्षेत्रीय स्थिरता की मांग दूसरी वजह भी
दक्षिण कोरिया का दबाव और क्षेत्रीय स्थिरता की मांग दूसरी वजह भी है। दक्षिण कोरिया की मौजूदा सरकार ये चाहती है कि उत्तर और दक्षिण के बीच संवाद बहाली हो सके। अमेरिका इस पहला का समर्थन देकर अपने सहयोगी देश को यह संकेत देने का प्रयास कर रहा है कि वह एशिया में स्थिरता को लेकर प्रतिबद्ध है।