अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सहयोगी देशों से होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा में मदद मांगी थी। ट्रंप ने कई देशों से कहा था कि वे अपने युद्धपोत भेजकर इस समुद्री रास्ते की निगरानी में सहयोग करें। उनका कहना था कि यह रास्ता दुनिया की ऊर्जा सप्लाई के लिए बेहद अहम है। ट्रंप ने बताया कि उनका प्रशासन कम से कम सात देशों से इस मुद्दे पर बातचीत कर रहा है और उम्मीद कर रहा है कि कई देश इसमें सहयोग करेंगे।
ट्रंप का सख्त संदेश भी आया सामने
होर्मुज को लेकर ट्रंप का रुख काफी सख्त नजर आया। उन्होंने कहा कि अगर सहयोगी देश मदद करते हैं तो यह अच्छा होगा और अगर नहीं करते तो भी अमेरिका अपने फैसले खुद लेने में सक्षम है। ट्रंप ने यह भी कहा कि यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन से देश इतने महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते को खुला रखने में अमेरिका की मदद नहीं करना चाहते। उनके इस बयान से साफ हो गया कि अमेरिका इस मुद्दे को गंभीरता से देख रहा है।
जापान और ऑस्ट्रेलिया ने बनाई दूरी
ट्रंप की अपील के बाद सबसे पहले जापान की प्रतिक्रिया सामने आई। जापान के प्रधानमंत्री ने कहा कि फिलहाल उनके देश को अमेरिका की ओर से होर्मुज में जहाजों को सुरक्षा देने के लिए कोई औपचारिक अनुरोध नहीं मिला है। इसलिए इस पर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है। वहीं ऑस्ट्रेलिया ने भी साफ संकेत दिए हैं कि वह इस मिशन के लिए अपने युद्धपोत भेजने की योजना नहीं बना रहा है।
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तुर्की और दक्षिण कोरिया का अलग रुख
नाटो का सदस्य तुर्की भी इस पूरे मामले में ज्यादा सक्रिय नजर नहीं आया और उसने इस संघर्ष से दूरी बनाने का संकेत दिया है। दूसरी ओर दक्षिण कोरिया ने कहा है कि वह इस मामले पर विचार कर रहा है और स्थिति को ध्यान से देख रहा है। अभी तक किसी भी देश ने साफ तौर पर युद्धपोत भेजने का ऐलान नहीं किया है, जिससे अमेरिका की योजना को बड़ा झटका लगा है।
फ्रांस और जर्मनी ने भी दिखाई हिचकिचाहट
यूरोप के कई देशों ने भी इस मामले में सावधानी भरा रुख अपनाया है। फ्रांस की रक्षा मंत्री ने कहा कि जब तक क्षेत्र में तनाव कम नहीं होता, तब तक फ्रांस अपने जंगी जहाज वहां नहीं भेजेगा। वहीं जर्मनी के विदेश मंत्री ने भी कहा कि इस तरह के मिशन से हालात बेहतर होंगे, इसकी कोई गारंटी नहीं है। इसलिए यूरोपीय देशों में भी इस मुद्दे को लेकर संदेह बना हुआ है।
दुनिया के लिए क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता माना जाता है। इस रास्ते से हर दिन करीब 20 मिलियन बैरल तेल गुजरता है, जो दुनिया की कुल खपत का लगभग 20 प्रतिशत है। इसके अलावा बड़ी मात्रा में गैस भी इसी रास्ते से दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचती है। ऐसे में अगर यहां कोई रुकावट आती है तो भारत और चीन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं पर भी इसका सीधा असर पड़ सकता है और वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं।