अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की पहल को बड़ा झटका लगा है। ट्रंप ने कई सहयोगी देशों से इस अहम समुद्री मार्ग की निगरानी के लिए युद्धपोत भेजने की अपील की थी, लेकिन जापान, ऑस्ट्रेलिया और तुर्की समेत कई देशों ने इससे दूरी बना ली है। दुनिया के लगभग 20% तेल परिवहन वाले इस मार्ग को लेकर वैश्विक ऊर्जा बाजार और भू-राजनीतिक समीकरणों में हलचल तेज हो गई है।
ट्रंप ने सहयोगी देशों से मांगा समर्थन
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच Donald Trump ने सहयोगी देशों से अपील की थी कि वे होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए अपने युद्धपोत भेजें। उनका तर्क था कि यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम है और इसे खुला रखना अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि कई देशों से बातचीत जारी है और उम्मीद है कि कुछ देश इस मिशन में शामिल होंगे।
जापान और ऑस्ट्रेलिया ने किया साफ इनकार
ट्रंप की अपील के बाद सबसे पहले जापान और ऑस्ट्रेलिया की ओर से ठंडा रुख सामने आया। जापान ने कहा कि उसे इस तरह के किसी ऑपरेशन के लिए औपचारिक अनुरोध नहीं मिला है, इसलिए अभी इस पर निर्णय लेना संभव नहीं है। वहीं ऑस्ट्रेलिया ने भी स्पष्ट संकेत दिया कि वह फिलहाल इस मिशन के लिए अपनी नौसेना नहीं भेजेगा।
तुर्की और यूरोपीय देशों की भी दूरी
नाटो सहयोगी तुर्की ने भी इस संघर्ष में सीधे शामिल होने से बचने का संकेत दिया है। इसके अलावा फ्रांस और जर्मनी ने भी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि जब तक क्षेत्र में युद्ध जैसी परिस्थितियां बनी रहेंगी, तब तक सैन्य तैनाती से बचना ही बेहतर होगा। यूरोपीय देशों का मानना है कि किसी भी सैन्य कदम से क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है।
साउथ कोरिया ने कहा – करेंगे विचार
दक्षिण कोरिया ने इस मामले में पूरी तरह इनकार नहीं किया है, लेकिन उसने कहा है कि वह स्थिति का अध्ययन कर रहा है। सरकार का कहना है कि ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किसी भी निर्णय पर सावधानी से विचार किया जाएगा। फिलहाल उसने तुरंत सैन्य तैनाती का फैसला नहीं लिया है।
क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य
Strait of Hormuz दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। यहां से हर दिन करीब 20 मिलियन बैरल तेल गुजरता है, जो वैश्विक खपत का लगभग पांचवां हिस्सा है। इसके अलावा बड़ी मात्रा में तरलीकृत प्राकृतिक गैस भी इसी रास्ते से भेजी जाती है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार और कई देशों की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।