मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात के बाद ट्रंप ने तेहरान में सत्ता परिवर्तन को “सबसे अच्छा विकल्प” बताया। अमेरिकी युद्धपोतों की तैनाती और अतिरिक्त एयरक्राफ्ट कैरियर की रवाना होने की घोषणा ने संकेत दे दिया है कि हालात कूटनीति से आगे बढ़कर टकराव की दिशा में जा सकते हैं।
सत्ता परिवर्तन पर सीधा बयान
Donald Trump ने साफ शब्दों में कहा कि अगर ईरान में सत्ता बदलती है तो यह दुनिया के लिए बेहतर साबित हो सकता है। नॉर्थ कैरोलाइना के फोर्ट ब्रैग में सैनिकों से मुलाकात के बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत में यह टिप्पणी की। उनका कहना था कि अमेरिका दशकों से ईरान के मौजूदा शासन से केवल आश्वासन सुनता आया है, लेकिन व्यवहार में कोई ठोस बदलाव नहीं दिखा।
नेतन्याहू से मुलाकात के बाद बढ़ा दबाव
हाल ही में ट्रंप की मुलाकात Benjamin Netanyahu से हुई, जिसके बाद उनके बयान और अधिक आक्रामक हो गए। विश्लेषकों का मानना है कि इजराइल की सुरक्षा चिंताओं और गाजा में जारी संघर्ष के बीच अमेरिका-इजराइल की रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होती दिख रही है। इस मुलाकात के बाद तेहरान पर कूटनीतिक और सैन्य दबाव बढ़ाने के संकेत स्पष्ट हैं।
युद्धपोतों की तैनाती और सैन्य तैयारी
ट्रंप ने बताया कि एक अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर पहले ही मिडिल ईस्ट पहुंच चुका है, जबकि दूसरा रास्ते में है। उन्होंने विशेष रूप से USS Gerald R. Ford का जिक्र किया, जिसे दुनिया के सबसे बड़े विमानवाहक पोतों में गिना जाता है। अतिरिक्त सैन्य संसाधनों की तैनाती को ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
परमाणु कार्यक्रम पर सख्त रुख
अमेरिका लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने की मांग करता रहा है। ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर बातचीत विफल रहती है तो तेहरान को “गंभीर परिणाम” भुगतने पड़ सकते हैं। ओमान और कतर में हालिया कूटनीतिक गतिविधियों के बावजूद वार्ता में ठोस प्रगति नहीं हो सकी है, जिससे सैन्य विकल्प की चर्चा तेज हो गई है।
क्षेत्रीय तनाव और आंतरिक दबाव
मिडिल ईस्ट पहले से ही गाजा संघर्ष और क्षेत्रीय अस्थिरता से जूझ रहा है। खाड़ी देशों ने चेतावनी दी है कि किसी भी बड़े हमले से व्यापक युद्ध भड़क सकता है। वहीं, ईरान के भीतर हालिया विरोध प्रदर्शनों और आर्थिक प्रतिबंधों के कारण सरकार पर आंतरिक दबाव भी बढ़ रहा है। ऐसे में ट्रंप के बयान ने वैश्विक राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।