अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर की जमकर सराहना की थी, जिससे पाकिस्तान में यह संदेश गया कि वॉशिंगटन अब पूरी तरह उसके साथ है। लेकिन 14 जनवरी 2026 की रात एक ऐसा आदेश आया, जिसने इन उम्मीदों को झटका दे दिया। ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तानियों के अमेरिका में बसने के रास्ते पर लगभग ताला लगा दिया।
तारीफों के बाद अचानक सख्ती क्यों?
डोनाल्ड ट्रंप ने आसिम मुनीर को ‘माई फेवरिट जनरल’ और ‘हाइली रिस्पेक्टेड’ जैसे शब्दों से नवाज़ा था। साथ ही पाकिस्तानी नेतृत्व को ‘ग्रेट पीपुल’ बताया गया। इससे पाकिस्तान में यह धारणा बनी कि अमेरिका अब उसका रणनीतिक संरक्षक बन चुका है। लेकिन इसके उलट, ट्रंप प्रशासन ने इमिग्रेशन नीति में सख्त फैसला लेते हुए पाकिस्तान को उन देशों की सूची में डाल दिया, जिनके नागरिक अमेरिका में स्थायी रूप से नहीं बस सकेंगे।
क्या है अमेरिकी आदेश, कब से लागू होगा?
अमेरिका ने पाकिस्तान और ईरान सहित कुल 75 देशों के नागरिकों के लिए इमिग्रेंट वीज़ा प्रक्रिया को अनिश्चितकाल के लिए निलंबित कर दिया है। यह आदेश 21 जनवरी 2026 से प्रभावी होगा। इसका मतलब है कि अब इन देशों के नागरिक ग्रीन कार्ड या परमानेंट रेजिडेंसी के लिए आवेदन नहीं कर पाएंगे। यह ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में इमिग्रेशन को सख्त करने की बड़ी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
किन वीज़ा पर पड़ा सबसे ज्यादा असर?
इस फैसले का सीधा असर इमिग्रेंट वीज़ा पर पड़ा है, जो किसी भी विदेशी नागरिक को अमेरिका में स्थायी रूप से रहने और काम करने की अनुमति देता है। इसमें अमेरिकी नागरिकों के जीवनसाथी, परिवार के सदस्य और रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड आवेदक शामिल होते हैं। अब पाकिस्तानी नागरिक न तो स्थायी नौकरी के लिए जा सकेंगे और न ही परिवार के साथ अमेरिका में बसने का सपना पूरा कर पाएंगे।
भारत लिस्ट से बाहर, पाकिस्तान में बढ़ी बेचैनी
खास बात यह है कि जिन 75 देशों पर रोक लगी है, उनमें भारत शामिल नहीं है। यानी भारतीय नागरिकों के लिए इमिग्रेंट वीज़ा प्रक्रिया जारी रहेगी। इसी कारण पाकिस्तान में यह सवाल तेज़ हो गया है कि जब अमेरिका-पाकिस्तान संबंध ‘बेहतर’ बताए जा रहे थे, तो फिर पाकिस्तानियों को इस सूची में क्यों डाला गया। यह फैसला पाकिस्तान की सियासी और कूटनीतिक जमात के लिए चौंकाने वाला माना जा रहा है।
अमेरिका की दलील और पाकिस्तान की प्रतिक्रिया
अमेरिका का कहना है कि यह कदम ‘पब्लिक चार्ज’ नियम से जुड़ा है, जिसके तहत यह आंका जाता है कि कोई अप्रवासी अमेरिकी संसाधनों पर बोझ तो नहीं बनेगा। वहीं पाकिस्तान ने इस कार्रवाई को अभूतपूर्व बताया है और कहा है कि वह अमेरिकी अधिकारियों से संपर्क में है। हालांकि यह प्रतिबंध पर्यटक और अस्थायी व्यावसायिक वीज़ा पर लागू नहीं होगा, लेकिन स्थायी निवास की चाह रखने वालों के लिए यह बड़ा झटका है।