अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तारीफ पसंद करने वाली प्रवृत्ति एक लीक फोन कॉल के बाद अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गई है। रूस और अमेरिका के टॉप सलाहकारों के बीच हुई इस बातचीत ने उजागर किया कि ट्रंप को प्रभावित करने के लिए उनकी प्रशंसा करना कितना कारगर माना जाता है। यूक्रेन युद्ध और गाज़ा संघर्ष के बीच जारी शांति प्रयासों के दौरान हुई यह कॉल अब वैश्विक राजनीति में बड़ा विवाद बनकर उभरी है।
ट्रंप को ‘शांति का नायक’ बताने की सलाह
14 अक्टूबर की इस कॉल में ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सलाहकार यूरी उषाकोव को सुझाव दिया कि पुतिन बातचीत की शुरुआत ट्रंप की खुलकर प्रशंसा से करें। उन्होंने उषाकोव से कहा कि ट्रंप को “गाज़ा का शांति नायक” और “विश्व शांति का नेतृत्वकर्ता” बताना बातचीत को सकारात्मक दिशा देगा।
तारीफ के बाद पेश होना था यूक्रेन का फॉर्मूला
लीक ट्रांसक्रिप्ट के अनुसार, विटकॉफ ने संकेत दिया कि ट्रंप प्रशंसा सुनने के बाद यूक्रेन संकट के लिए रूस के समाधान प्रस्ताव को सुनने के लिए ज्यादा इच्छुक होंगे। विटकॉफ ने दावा किया कि “मेरा आदमी इसके लिए तैयार है”, जिससे स्पष्ट होता है कि बातचीत की रणनीति पूरी तरह से ट्रंप की भावनाओं को ध्यान में रखकर बनाई जा रही थी।
गाज़ा डील के बाद बढ़ी कूटनीतिक हलचल
यह कॉल गाज़ा युद्धविराम समझौते के तुरंत बाद की है, जब दुनिया का फोकस यूक्रेन युद्ध समाप्त करने की दिशा में बढ़ रहा था। विटकॉफ ने यहां तक सुझाव दिया कि गाज़ा की तरह ही “20-पॉइंट पीस प्लान” यूक्रेन के लिए भी तैयार किया जा सकता है। इस बातचीत के दो दिन बाद ट्रंप और पुतिन की मुलाकात भी हुई थी।
ट्रंप की प्रतिक्रिया—‘यह तो बातचीत का सामान्य तरीका’
कॉल के लीक होने के बाद भी ट्रंप के तेवर नरम रहे। उन्होंने इसे बातचीत का “स्टैंडर्ड तरीका” बताया। दूसरी ओर, रूस ने इसे “हाइब्रिड वॉरफेयर” की कोशिश कहा और आरोप लगाया कि इसका उद्देश्य शांति प्रक्रिया को कमजोर करना है।
क्या यह लीक वार्ता कूटनीति को प्रभावित करेगी?
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नेताओं की व्यक्तिगत पसंद-नापसंद का इस तरह उजागर होना कई वार्ताओं पर असर डाल सकता है। यूक्रेन युद्ध जैसे संवेदनशील मुद्दे पर ऐसी घटनाएं भविष्य की रणनीतियों और भरोसे पर भी प्रभाव डाल सकती हैं।