अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और रूसी ऊर्जा खरीदने वाले बड़े देशों पर नए कड़े प्रतिबंधों और टैरिफ को फिलहाल लागू न करने के अपने फैसले का बचाव किया है। उनका कहना है कि वह यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए चल रही शांति वार्ता को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते।
महत्वपूर्ण प्रावधानों को अस्थायी रूप से किया लागू
ट्रंप ने यह सफाई उस फैसले के दो दिन बाद दी, जिसमें उन्होंने 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शिनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' के कई महत्वपूर्ण प्रावधानों को अस्थायी रूप से लागू न करने का आदेश दिया था। इस कानून के तहत अतिरिक्त टैरिफ लगाए जा सकते थे, जिनका असर भारत पर भी पड़ सकता था, क्योंकि भारत रूस से तेल खरीदता है।
नए आर्थिक दबाव डाले गए
ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार युद्ध को खत्म करने के लिए बातचीत में प्रगति कर रही है। उनके मुताबिक, अगर इस समय रूस पर नए आर्थिक दबाव डाले गए, तो वह बातचीत की मेज छोड़ सकता है।
ऐसा कोई कदम नहीं उठाना
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा, "मैं रूस-यूक्रेन युद्ध में शांति स्थापित करने के लिए बातचीत कर रहा हूं और ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहता जो रूस को बेवजह बातचीत से दूर कर दे।"
उन्होंने अपने फैसले को ईरान और वैश्विक ऊर्जा बाजार से भी जोड़ा। ट्रंप का कहना है कि रूस फिलहाल ईरान की उतनी मदद नहीं कर रहा जितनी वह कर सकता है और वह इस स्थिति को बनाए रखना चाहते हैं।
उपभोक्ताओं और कारोबारों पर असर पड़ता है
इसके अलावा, उन्होंने यूक्रेन की ओर से रूस की डीजल रिफाइनरियों पर किए जा रहे हमलों की आलोचना की। ट्रंप के मुताबिक, इससे ईंधन आपूर्ति प्रभावित होती है और दुनिया भर में उपभोक्ताओं और कारोबारों पर असर पड़ता है।
शुक्रवार को हस्ताक्षर किए गए कार्यकारी आदेश के तहत कुछ रूसी सामानों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने और रूसी कच्चा तेल व प्राकृतिक गैस खरीदने वाले पांच सबसे बड़े आयातक देशों के सामानों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान रखा गया था।