
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को हाल ही में अपनी ही नीतियों पर बड़ा झटका लगा है. दरअसल ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA) के तहत कई देशों पर भारी-भरकम टैरिफ (आयात शुल्क) लगाए थे. लेकिन अब अमेरिकी अपील अदालत ने इन टैरिफ को ज्यादातर मामलों में अवैध करार दे दिया है. अमेरिकी अदालत ने अपने फैसले में साफ कहा कि संविधान के मुताबिक कर और टैरिफ लगाने का असली अधिकार सिर्फ कांग्रेस (अमेरिकी संसद) के पास है न कि राष्ट्रपति के पास. अदालत का कहना था कि जब IEEPA बनाया गया था तो उसका मकसद राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने की असीमित ताकत देना नहीं था. हालांकि अदालत ने ये भी कहा कि यह टैरिफ अभी 14 अक्टूबर तक लागू रहेंगे ताकि ट्रंप प्रशासन के पास सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का समय मिल सके.
भारत और रूस पर असर
इस फैसले का सीधा असर भारत और रूस जैसे देशों पर भी पड़ेगा. बता दें कि भारत पर ट्रंप ने 25% का अतिरिक्त टैरिफ लगाया था. रूस से आने वाले तेल पर भी 25% अतिरिक्त शुल्क लगाया गया था. अब अदालत के इस आदेश के बाद ये टैरिफ रुक सकते हैं. लेकिन ध्यान देने वाली बात ये है कि स्टील और एल्युमिनियम पर लगाया गया 50% शुल्क अभी भी जारी रहेगा क्योंकि वह IEEPA नहीं बल्कि ट्रेड एक्सपेंशन एक्ट (1962) की धारा 232 के तहत लगाया गया था.
ट्रंप ने IEEPA का इस्तेमाल क्यों किया?
अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक ने अदालत में दलील दी थी कि राष्ट्रपति के पास ज्यादा विकल्प नहीं थे. सेक्शन 232 के तहत जांच और फैसला करने में एक साल तक का समय लगता है. सेक्शन 301 (ट्रेड एक्ट 1974) भी लंबा और जटिल प्रोसेस है. इसके मुकाबले IEEPA से राष्ट्रपति तुरंत कदम उठा सकते हैं अगर मामला "राष्ट्रीय सुरक्षा" या "देशहित" से जुड़ा हो. यही वजह थी कि ट्रंप ने इस कानून का सहारा लिया.
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असली मकसद क्या था?
अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञ मार्कस वाग्नर का कहना है कि ट्रंप और उनकी टीम को पहले से ही पता था कि अदालत IEEPA का इस्तेमाल अवैध ठहराएगी. लेकिन उनका असली मकसद समय खरीदना था. उन्होंने कहा, “ट्रंप प्रशासन जानता था कि ये फैसले कानूनी प्रक्रिया में उलझ जाएंगे और लागू होने में वक्त लगेगा. यही उनकी रणनीति थी.”
कानून विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की रणनीति में कोई बदलाव नहीं आया है. असली सवाल यह है कि बाकी देश जैसे भारत और रूस, इस पर कैसे प्रतिक्रिया देंगे. क्या वो अमेरिकी फैसलों को मानेंगे या फिर नुकसान कम करने के लिए अपने तरीके अपनाएंगे?
कह सकते हैं कि ट्रंप ने जल्दबाज़ी में टैरिफ लगाने के लिए एक ऐसा कानून इस्तेमाल किया, जो अदालत के हिसाब से सही नहीं था. अब अदालत ने उन फैसलों पर रोक लगा दी है लेकिन ट्रंप प्रशासन के पास अभी भी सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प है. भारत और दूसरे देशों के लिए यह राहत की खबर हो सकती है क्योंकि उन पर लगाए गए भारी- भरकम आयात शुल्क हट सकते हैं.