अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के दौरान कई देशों से आने वाले सामान पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया था। अब सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद इन टैरिफ की वैधता पर सवाल खड़े हो गए हैं। अदालत ने माना कि कुछ मामलों में लगाए गए अतिरिक्त शुल्क कानूनी आधार पर कमजोर थे। इसके बाद उन कंपनियों की उम्मीदें बढ़ गई हैं जिन्होंने वर्षों तक यह अतिरिक्त बोझ उठाया था।
रिफंड को लेकर शुरू हुई नई लड़ाई
फैसले के बाद अमेरिकी कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन ने रिफंड प्रक्रिया शुरू करने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था तैयार की है। लेकिन असली विवाद यह है कि पैसा केवल उन्हीं कंपनियों को लौटाया जाए जिन्होंने अदालत में चुनौती दी थी या फिर उन सभी आयातकों को जिन्होंने अतिरिक्त टैरिफ का भुगतान किया था। इसी सवाल ने कानूनी और कारोबारी जगत में नई बहस छेड़ दी है।
जज ने सरकार से पूछे सख्त सवाल
कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड के जज रिचर्ड ईटन ने सुनवाई के दौरान सरकार के रुख पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार की तकनीकी व्यवस्था तो सभी पात्र कंपनियों को रिफंड देने जैसी दिखती है, लेकिन कानूनी दलीलें अलग तस्वीर पेश कर रही हैं। जज ने संकेत दिया कि अत्यधिक कानूनी जटिलता रिफंड प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।
ये भी पढ़ें : Modi के नाम नया इतिहास! नेहरू का रिकॉर्ड टूटा, कैबिनेट ने खड़े होकर किया सम्मान
हजारों कंपनियों को मिल सकता है फायदा
अगर अदालत सभी प्रभावित आयातकों को रिफंड देने का आदेश देती है तो हजारों कंपनियों को अरबों डॉलर वापस मिल सकते हैं। सबसे ज्यादा लाभ उन कारोबारियों को होगा जिन्होंने बड़ी मात्रा में विदेशी सामान आयात किया था और अतिरिक्त टैरिफ का भुगतान किया था। इससे कई कंपनियों की वित्तीय स्थिति भी मजबूत हो सकती है।
कई कंपनियां रह सकती हैं खाली हाथ
दूसरी तरफ अगर न्याय विभाग की दलील मान ली जाती है तो केवल वही कंपनियां रिफंड पाने की हकदार होंगी जिन्होंने पहले अदालत का दरवाजा खटखटाया था। ऐसे में बड़ी संख्या में आयातक इस लाभ से वंचित रह जाएंगे। यही वजह है कि कारोबारी जगत की नजरें अब अदालत के अगले फैसले पर टिकी हुई हैं।
अब अपील कोर्ट के फैसले का इंतजार
फिलहाल पूरा मामला अमेरिकी अपील कोर्ट के पास पहुंच चुका है। यही अदालत तय करेगी कि रिफंड का दायरा कितना बड़ा होगा और किन कंपनियों को इसका लाभ मिलेगा। आने वाले दिनों में यह फैसला अमेरिका के हजारों कारोबारियों और अरबों डॉलर के भुगतान पर बड़ा असर डाल सकता है।