
गुरुवार सुबह भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक झटके भरी खबर आई. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 25 प्रतिशत का नया टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने की घोषणा कर दी. इसके साथ ही उन्होंने रूस से सस्ते कच्चे तेल की खरीद पर जुर्माना लगाने की बात भी कही. इस खबर से भारतीय शेयर बाजार में घबराहट फैल गई और शुरुआती कारोबार में ही भारी गिरावट देखी गई. निवेशकों को कुछ ही मिनटों में करोड़ों रुपये का नुकसान हो गया.
रुपये में हल्की मजबूती देखने को मिली
हालांकि इस नकारात्मक माहौल के बावजूद भारतीय रुपये में हल्की मजबूती दर्ज की गई. गुरुवार को बाजार खुलते ही रुपया 14 पैसे की मजबूती के साथ 87.66 प्रति डॉलर पर पहुंच गया. यह हालांकि अब भी पिछले पांच महीनों का सबसे निचला स्तर बना हुआ है, लेकिन इसमें थोड़ा सुधार दर्ज किया गया है.
आरबीआई के दखल की संभावना
रुपये में सुधार को लेकर माना जा रहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की तरफ से दखल देने की संभावना बढ़ गई है. जब भी डॉलर के मुकाबले रुपया बहुत ज्यादा गिरता है, तो आरबीआई बाजार में हस्तक्षेप करता है ताकि रुपये को संभाला जा सके. ऐसा माना जा रहा है कि आरबीआई ने डॉलर की बिक्री के जरिए रुपया संभालने की कोशिश की है, जिससे बाजार में थोड़ी स्थिरता आई.
ट्रंप के फैसले का भारत पर असर
ट्रंप के टैरिफ और रूस पर सख्ती के फैसले का भारत की अर्थव्यवस्था पर सीधा असर हो सकता है. भारत कई जरूरी चीजें अमेरिका से मंगाता है, और अगर उन पर 25% टैक्स लग गया तो उनकी कीमतें बढ़ेंगी. वहीं रूस से सस्ता कच्चा तेल भारत बड़ी मात्रा में खरीदता है, अगर उस पर भी पाबंदी लग गई तो तेल महंगा होगा, जिससे महंगाई और रुपये पर दबाव बढ़ सकता है.
शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव
इन घोषणाओं के बाद शेयर बाजार में भी भारी उतार-चढ़ाव देखा गया. शुरुआती घंटों में सेंसेक्स और निफ्टी में तेज गिरावट आई. निवेशकों ने घबराकर बड़ी संख्या में शेयर बेचे, जिससे मार्केट में कमजोरी आई. हालांकि दिन चढ़ने के साथ बाजार थोड़ा संभला, लेकिन निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा है.
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका की ये नीतियां लागू हो गईं तो भारत को आर्थिक मोर्चे पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है. आने वाले दिनों में सरकार और आरबीआई की भूमिका अहम होगी कि वो कैसे स्थिति को संभालते हैं और रुपये को स्थिर बनाए रखते हैं.