अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने सख्त बयानों और टैरिफ धमकियों को लेकर सुर्खियों में हैं। बीते कुछ समय से वह लगातार ऐसे फैसले और चेतावनियां दे रहे हैं, जिनसे दुनिया भर में तनाव बढ़ता दिख रहा है। वेनेजुएला, ईरान और चीन से जुड़े देशों के बाद अब ट्रंप के निशाने पर क्यूबा आ गया है। ट्रंप की नीतियों में एक बात साफ नजर आती है कि ज्यादातर फैसलों के केंद्र में तेल और ऊर्जा का खेल है। यही वजह है कि क्यूबा में हालात और ज्यादा बिगड़ते दिख रहे हैं।
क्यूबा को तेल बेचने वालों पर टैरिफ की धमकी
डोनाल्ड ट्रंप ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर कोई देश क्यूबा को तेल बेचता है, तो उस पर भारी टैरिफ लगाया जा सकता है। यह चेतावनी एक नए कार्यकारी आदेश के जरिए सामने आई है। हालांकि अभी यह साफ नहीं किया गया है कि किन देशों को सीधे तौर पर निशाना बनाया जाएगा। इससे पहले ट्रंप ईरान के तेल व्यापार को लेकर भी इसी तरह की धमकियां दे चुके हैं। अब क्यूबा को लेकर यह कदम वैश्विक बाजार में चिंता बढ़ा रहा है।
आखिर ट्रंप को क्यूबा से दिक्कत क्या है
ट्रंप प्रशासन लंबे समय से क्यूबा और वहां की कम्युनिस्ट सरकार के खिलाफ सख्त रुख अपनाए हुए है। अमेरिका का आरोप है कि क्यूबा की नीतियां उसके लिए खतरा हैं और वह अमेरिका के दुश्मनों को पनाह देता है। इसी दबाव को बढ़ाने के लिए ट्रंप ने अब टैरिफ का रास्ता चुना है। यह कदम क्यूबा पर आर्थिक दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
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बिजली और ईंधन संकट से जूझता क्यूबा
अमेरिकी सख्ती का असर क्यूबा की आम जनता पर साफ दिखने लगा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक देश में बार बार बिजली गुल हो रही है। ईंधन की कमी के चलते बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ है और लोगों को लंबे कटौती झेलनी पड़ रही है। वेनेजुएला के तेल टैंकरों पर कार्रवाई और आपूर्ति रुकने से हालात और खराब हो गए हैं। रोजमर्रा की जिंदगी में परेशानियां बढ़ती जा रही हैं।
वेनेजुएला कनेक्शन ने बढ़ाई मुश्किलें
क्यूबा की मुश्किलों के पीछे वेनेजुएला से जुड़ा पहलू भी अहम माना जा रहा है। पहले वेनेजुएला क्यूबा को रोजाना बड़ी मात्रा में तेल भेजता था। लेकिन हाल के राजनीतिक और सैन्य घटनाक्रम के बाद यह आपूर्ति लगभग बंद हो गई है। इससे क्यूबा की ऊर्जा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और संकट गहराता चला गया है।
क्यूबा का जवाब और अमेरिका से टकराव
क्यूबा सरकार ने ट्रंप की धमकियों को सिरे से खारिज किया है। क्यूबा के विदेश मंत्री ने कहा है कि देश को किसी भी इच्छुक राष्ट्र से तेल और गैस खरीदने का पूरा अधिकार है। वहीं राष्ट्रपति मिगुएल डियाज कैनेल ने भी साफ कहा कि अमेरिका को क्यूबा पर शर्तें थोपने का कोई नैतिक हक नहीं है। अब सवाल यह है कि ट्रंप की यह टैरिफ राजनीति दुनिया को किस दिशा में ले जाएगी और क्यूबा इस दबाव से कैसे निपटेगा।