Trump Tariffs On India : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति ने वैश्विक व्यापार की तस्वीर बदल दी है। अब अमेरिका सिर्फ व्यापार घाटे या आयात-निर्यात को लेकर शुल्क नहीं लगा रहा, बल्कि रूस से तेल खरीद, फेंटेनाइल, ड्रग तस्करी, अवैध प्रवासन, परमाणु कार्यक्रम और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों को भी टैरिफ और प्रतिबंधों से जोड़ रहा है। भारत, चीन, कनाडा समेत 10 देश अलग-अलग वजहों से अमेरिकी दबाव का सामना कर रहे हैं।
रूस से तेल बना भारत की मुश्किल
भारत पर अमेरिकी टैरिफ के पीछे रूस से तेल खरीदना एक प्रमुख मुद्दा है। भारत पर पहले 25 फीसदी पारस्परिक टैरिफ लगाया गया और इसके बाद रूसी तेल खरीदने के कारण अतिरिक्त 25 फीसदी शुल्क लगाया गया। इसके अलावा जबरन मजदूरी से बने सामान के आयात को लेकर भी भारत पर सेक्शन 301 के तहत 10 फीसदी टैरिफ लगाया गया है। दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत भी जारी है।
चीन और कनाडा पर अलग दबाव
चीन के मामले में अमेरिका का बड़ा मुद्दा फेंटेनाइल केमिकल्स की सप्लाई है। अमेरिका का आरोप है कि चीन ने इसे रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए। इसके जवाब में चीन ने अमेरिकी सामान पर शुल्क लगाने के साथ कुछ महत्वपूर्ण खनिजों पर निर्यात प्रतिबंध भी लगाए। वहीं कनाडा के साथ टैरिफ विवाद फेंटेनाइल और अवैध प्रवासन से जुड़ा है। ऑटो सेक्टर ने भी दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ाया है।
ईरान से लेकर रूस तक निशाना
ईरान पर अमेरिकी कार्रवाई परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम, तेल कारोबार तथा सैन्य गतिविधियों से जुड़े मुद्दों को लेकर है। अमेरिका उन कंपनियों और देशों पर भी कार्रवाई की चेतावनी दे रहा है जो ईरान के साथ कारोबार करते हैं। रूस पर मुख्य प्रतिबंध यूक्रेन युद्ध के कारण हैं। साथ ही रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर भी भारी टैरिफ का दबाव बनाया जा रहा है।
यूरोप और लैटिन अमेरिका भी दायरे में
यूरोपीय संघ के साथ अमेरिका का विवाद रूस-यूक्रेन युद्ध, रक्षा खर्च और प्रवासन जैसे मुद्दों तक पहुंच चुका है। ईयू के अधिकांश सामानों के लिए 15 फीसदी टैरिफ सीमा तय हुई है। कोलंबिया के साथ विवाद निर्वासित प्रवासियों की वापसी और ड्रग तस्करी से शुरू हुआ। बाद में जबरन मजदूरी से जुड़े नियमों के तहत अतिरिक्त टैरिफ भी लगाया गया।
मेक्सिको से क्यूबा तक बढ़ता दबाव
मेक्सिको पर अवैध प्रवासन और फेंटेनाइल तस्करी को लेकर अमेरिकी दबाव है। हालांकि USMCA के तहत उसके बड़े हिस्से के निर्यात को शुल्क से राहत मिलती है। वेनेजुएला के मामले में तेल, ड्रग्स और प्रवासन तीनों मुद्दे जुड़े हैं और वहां से तेल खरीदने वाले तीसरे देशों पर भी कार्रवाई का रास्ता अपनाया गया है। क्यूबा पर तेल और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर दबाव बढ़ाया गया है।
टैरिफ अब विदेश नीति का हथियार
इन सभी मामलों को देखें तो ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीति सिर्फ व्यापार तक सीमित नजर नहीं आती। अमेरिका अब शुल्क और प्रतिबंधों का इस्तेमाल दूसरे देशों के ऊर्जा सौदों, प्रवासन नीति, ड्रग नियंत्रण और विदेश नीति से जुड़े फैसलों को प्रभावित करने के लिए कर रहा है। इसका सीधा असर वैश्विक कंपनियों, सप्लाई चेन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अनिश्चितता पर पड़ रहा है।