भारतीय शेयर बाजार में लगातार चौथे दिन भारी दबाव देखने को मिला है। कारोबार की शुरुआत से ही बिकवाली हावी रही और दोपहर तक हालात और बिगड़ते चले गए। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स करीब सात सौ पचास अंकों की गिरावट के साथ नीचे फिसल गया, जबकि निफ्टी भी दो सौ साठ अंकों से ज्यादा टूटकर महत्वपूर्ण स्तर से नीचे आ गया। बाजार की यह गिरावट निवेशकों की चिंता बढ़ा रही है।
तेल और धातु कंपनियों पर सबसे ज्यादा असर
गिरते बाजार में सबसे ज्यादा दबाव तेल और धातु क्षेत्र की कंपनियों पर दिखा। कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में तीन से चार प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। ऊर्जा और धातु से जुड़ी कंपनियों में बिकवाली ने पूरे बाजार की धारणा को कमजोर कर दिया। इसका असर बैंकिंग और वित्तीय शेयरों पर भी देखने को मिला।
अमेरिका से जुड़ी बड़ी वजह सामने आई
विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका से जुड़ी एक नई राजनीतिक चाल है। अमेरिका में रूस के खिलाफ एक नया सख्त कानून प्रस्तावित किया गया है, जिसके तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर भारी शुल्क लगाया जा सकता है। भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता रहा है, इसी वजह से निवेशकों में डर बढ़ गया है।
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पांच सौ प्रतिशत शुल्क की आशंका
इस प्रस्तावित कानून के तहत कुछ देशों पर पांच सौ प्रतिशत तक शुल्क लगाए जाने की चर्चा है। अगर ऐसा होता है, तो भारत से अमेरिका भेजे जाने वाले सामान महंगे हो सकते हैं। इससे भारत के निर्यात पर सीधा असर पड़ेगा और कंपनियों की कमाई घट सकती है। इसी आशंका ने बाजार में बेचैनी बढ़ा दी है, हालांकि अभी सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बढ़ाया दबाव
बाजार पर दबाव की एक और बड़ी वजह विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली है। नए साल की शुरुआत से ही विदेशी निवेशक बड़ी मात्रा में भारतीय शेयर बेच रहे हैं। इसके साथ ही एशियाई और अमेरिकी बाजारों में कमजोरी ने भी घरेलू बाजार की धारणा को और नकारात्मक बना दिया है।
आगे राहत की उम्मीद कहां से
हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि यह गिरावट पूरी तरह स्थायी नहीं हो सकती। आने वाले दिनों में कंपनियों के तिमाही नतीजे सामने आएंगे, जिससे बाजार की दिशा बदल सकती है। फिलहाल निवेशकों के लिए सतर्कता जरूरी है और जल्दबाजी में फैसले लेने से बचने की सलाह दी जा रही है।