वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन के साथ ही अमेरिका और लैटिन अमेरिकी देश के रिश्तों में जबरदस्त तनाव देखने को मिल रहा है। कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज के शपथ लेते ही अमेरिका को दी गई कड़ी चुनौती के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तेवर और तीखे हो गए हैं। ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि वेनेजुएला पर दोबारा सैन्य कार्रवाई से इनकार नहीं किया जा सकता, जिससे हालात और गंभीर हो गए हैं।
ट्रंप की चेतावनी से बढ़ी वैश्विक चिंता
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि वहां दूसरा सैन्य हमला अभी भी एक विकल्प हो सकता है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि फिलहाल प्राथमिकता वेनेजुएला का मुद्दा है, अन्य अंतरराष्ट्रीय मामलों पर बाद में विचार किया जाएगा। ट्रंप के इस बयान को सीधे तौर पर दबाव की राजनीति के तौर पर देखा जा रहा है, जिससे कूटनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
शपथ लेते ही रोड्रिगेज का आक्रामक संदेश
कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेने के बाद डेल्सी रोड्रिगेज ने राष्ट्र के नाम संबोधन में अमेरिका को दो टूक जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वेनेजुएला अब किसी भी साम्राज्यवादी ताकत की कठपुतली नहीं बनेगा। रोड्रिगेज ने यह भी स्पष्ट किया कि देश के प्राकृतिक संसाधनों—तेल और खनिज—पर वेनेजुएला का ही अधिकार रहेगा और बाहरी दबाव को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
अमेरिकी दावों को किया खारिज
रोड्रिगेज ने ट्रंप प्रशासन के उन दावों को सिरे से नकार दिया, जिनमें कहा गया था कि वेनेजुएला अमेरिका की शर्तों पर काम करेगा। उन्होंने यह भी साफ किया कि किसी भी विदेशी सरकार के साथ बातचीत वेनेजुएला की संप्रभुता और सम्मान के दायरे में ही होगी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा सौंपी गई जिम्मेदारी को उन्होंने “देश की रक्षा” से जोड़ते हुए सख्त रुख अपनाया।
सड़कों पर उतरा जनाक्रोश
अमेरिकी कार्रवाई और राजनीतिक घटनाक्रम के बाद वेनेजुएला में जनता का गुस्सा खुलकर सामने आया है। राजधानी काराकस समेत कई शहरों में लोगों ने प्रदर्शन कर अमेरिका विरोधी नारे लगाए। इन प्रदर्शनों ने यह संकेत दिया है कि मौजूदा हालात केवल सत्ता तक सीमित नहीं, बल्कि जनभावनाओं से भी गहराई से जुड़े हुए हैं।
भारत की संयमित प्रतिक्रिया
वेनेजुएला में बढ़ते तनाव पर भारत ने चिंता व्यक्त की है। विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर शांतिपूर्ण समाधान और संवाद के जरिए हालात सामान्य करने की अपील की है। साथ ही, काराकस स्थित भारतीय मिशन को भारतीय नागरिकों के संपर्क में रहने और हर संभव सहायता देने के निर्देश दिए गए हैं।