Trump Warning: रूस-यूक्रेन युद्ध को रोकने के अपने प्रयासों की विफलता के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया के देशों को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा है कि जो भी देश रूस के साथ व्यापार करेगा, उस पर 'बहुत कड़ी पाबंदियां' लगाई जाएंगी। न्यूयॉर्क/वाशिंगटन में दिए बयान में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका प्रशासन और रिपब्लिकन सांसद मॉस्को को निशाना बनाने वाले कड़े कानून पर आगे बढ़ रहे हैं। ट्रंप ने दोहराया, "कोई भी देश जो रूस के साथ व्यापार करेगा, उसे बहुत कड़ी पाबंदियों का सामना करना पड़ेगा। हम इसमें ईरान को भी शामिल कर सकते हैं, यह सुझाव मैंने दिया था।" ट्रंप का यह रुख ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस रूस पर दबाव बढ़ाने के लिए उपाय लागू करने पर विचार कर रही है।
रूस पर दबाव बनाने की संसदीय तैयारी
ट्रंप के बयान के बाद, अमेरिकी संसद में रूस पर दबाव बनाने की तैयारी तेज हो गई है। सांसद लिंडसे ग्राहम और रिचर्ड ब्लूमेंथल ने संयुक्त रूप से "रूस प्रतिबंध अधिनियम 2025" पेश किया है। इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य उन देशों पर शुल्क और प्रतिबंध लगाना है जो यूक्रेन में व्लादिमीर पुतिन के युद्ध को जारी रखने के लिए धन मुहैया करा रहे हैं। इस प्रस्तावित विधेयक में रूसी तेल की खरीद और बिक्री पर 500 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का प्रस्ताव है। इस कड़े प्रस्ताव को संसद की विदेश संबंध समिति में लगभग सर्वसम्मत समर्थन मिला है, जो रूस के खिलाफ अमेरिका की आक्रामक नीति का संकेत देता है।
भारत पर अतिरिक्त शुल्क का दबाव
राष्ट्रपति ट्रंप ने इस संदर्भ में भारत पर लगे शुल्कों का भी जिक्र किया। ट्रंप प्रशासन ने भारत पर पहले से ही 50 प्रतिशत शुल्क लगाया हुआ है, जो दुनिया में सबसे अधिक शुल्कों में से एक है। इसमें रूसी तेल की खरीद को लेकर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क भी शामिल है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि यह शुल्क मौजूदा है या प्रस्तावित। रूसी तेल खरीद पर 500 प्रतिशत शुल्क लगाने का विधेयक अगर पारित होता है, तो भारत जैसे बड़े खरीदारों पर रूस से व्यापार जारी रखने के लिए भारी आर्थिक दबाव पड़ेगा, जिससे उन्हें अमेरिकी प्रतिबंधों और शुल्कों का सामना करना पड़ सकता है।