अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दुनिया के देशों को टैरिफ को लेकर सख्त संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि जो देश हाल में हुए टैरिफ समझौतों से पीछे हटने की कोशिश करेंगे, उन्हें और ज्यादा शुल्क चुकाना पड़ेगा। ट्रंप ने साफ किया कि वे वैश्विक टैरिफ को 15 प्रतिशत तक बढ़ाना चाहते हैं।
कोर्ट के फैसले के बावजूद बयान
यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने पिछले सप्ताह ट्रंप के कई टैरिफ आदेशों को रद्द कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि टैक्स और शुल्क लगाने का अधिकार संविधान के अनुसार कांग्रेस को है। इसके बावजूद ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर अपने रुख को दोहराया।
क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने
उच्चतम न्यायालय ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाया था। अदालत ने कहा कि संविधान स्पष्ट रूप से कर लगाने की शक्ति कांग्रेस को देता है। मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने लिखा कि कार्यपालिका को कराधान का अधिकार नहीं सौंपा गया है। हालांकि तीन न्यायाधीशों ने इस फैसले से असहमति जताई।
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ट्रंप का तर्क क्या है
ट्रंप का कहना है कि कई देशों ने वर्षों तक अमेरिका का आर्थिक फायदा उठाया है। उन्होंने कहा कि अगर कोई देश अदालत के फैसले की आड़ लेकर समझौते से बचने की कोशिश करेगा तो उसे पहले से तय शुल्क से भी ज्यादा टैरिफ देना होगा। उनका दावा है कि यह कदम अमेरिकी हितों की रक्षा के लिए जरूरी है।
ग्लोबल टैरिफ पर असर
ट्रंप ने पहले 10 प्रतिशत टैरिफ की घोषणा की थी, लेकिन अब इसे 15 प्रतिशत तक बढ़ाने की बात कही है। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर असर पड़ सकता है। कई देशों ने पहले ही इस कदम पर चिंता जताई है और इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बताया है।
आगे क्या हो सकता है
अब सवाल यह है कि कोर्ट के फैसले और ट्रंप के बयान के बाद आगे क्या स्थिति बनती है। क्या कांग्रेस इस मुद्दे पर कदम उठाएगी या राष्ट्रपति कोई नया रास्ता निकालेंगे, यह देखना होगा। फिलहाल टैरिफ को लेकर अमेरिका और बाकी दुनिया के बीच तनाव बना हुआ है।