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PM Modi-Xi Jinping meeting: चीन के तियानजिन में 31 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात ने वैश्विक राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी। SCO समिट से इतर हुई इस बैठक में दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने, आपसी सहयोग बढ़ाने और वैश्विक मुद्दों पर मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दिखाई। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, पीएम मोदी और जिनपिंग ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और चीन विकास के साझेदार हैं, प्रतिद्वंद्वी नहीं, और मतभेद कभी विवाद का रूप नहीं लेने चाहिए। इसी दौरान पीएम मोदी ने राष्ट्रपति शी को भारत में होने वाले 2026 ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए आमंत्रण भी दिया।
नवारो का भारत विरोधी बयान
भारत और चीन की बढ़ती नजदीकी से अमेरिकी खेमे में नाराजगी साफ दिखने लगी है। डोनाल्ड ट्रंप के पूर्व सलाहकार पीटर नवारो ने फॉक्स न्यूज पर दिए बयान में भारत पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भारत रूस से सस्ते तेल की खरीद करके "रूसी युद्ध मशीन" को फाइनेंस कर रहा है। नवारो के अनुसार, फरवरी 2022 से पहले भारत रूस से बहुत कम तेल आयात करता था, लेकिन अब रियायती दाम पर कच्चा तेल लेकर उसे रिफाइन कर यूरोप, अफ्रीका और एशिया में बेचकर मुनाफा कमा रहा है। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया से रूस को यूक्रेन में युद्ध जारी रखने की ताकत मिल रही है और भारत "क्रेमलिन की वॉशिंग मशीन" बन गया है।
ट्रंप के टैरिफ और भारत-चीन की नजदीकी
नवारो इससे पहले भी भारत को यूक्रेन युद्ध का फाइनेंशर करार दे चुके हैं। वहीं, ट्रंप प्रशासन ने भारत पर लगातार टैरिफ का बोझ डाला है। 27 अगस्त से लागू नए नियम के तहत अमेरिका ने भारत पर 50 फीसदी तक टैरिफ लगा दिया है। माना जा रहा है कि इसका असर भारत के कई सेक्टर पर पड़ सकता है। हालांकि, भारत नए बाजारों की तलाश में जुटा है और चीन के साथ सहयोग बढ़ाने से इस दबाव को कम करने की कोशिश कर रहा है। तियानजिन में मोदी-जिनपिंग मुलाकात ने यही संदेश दिया कि वैश्विक दबाव के बावजूद एशिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं साझा आधार तलाश रही हैं।