
Israel-Hamas ceasefire: गाजा में शांति की उम्मीद एक बार फिर टूट गई है। अमेरिका और कतर की मध्यस्थता से हुआ हालिया सीजफायर ज़्यादा देर तक नहीं टिक सका। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हमास पर युद्धविराम तोड़ने का आरोप लगाते हुए गाजा में ‘ज़ोरदार हमलों’ का आदेश दे दिया है। इजरायली सेना का कहना है कि हमास ने उनके सैनिकों पर गोलियां चलाईं और एक बंधक का शव लौटाने के बाद संघर्ष विराम का उल्लंघन किया। नेतन्याहू ने इसे सीजफायर समझौते का “खुला उल्लंघन” बताया और जवाबी कार्रवाई का निर्देश दिया। इससे अमेरिका की मध्यस्थता में हुआ शांति समझौता टूट गया, जिसे डोनाल्ड ट्रंप का “पीस प्लान” कहा जा रहा था।
प्रैक्टिकल नहीं था ट्रंप का शांति समझौता
विश्लेषकों के मुताबिक, ट्रंप की शांति योजना ज़मीनी हकीकत से कोसों दूर थी। समझौते के तहत हमास को हथियार डालने और इजरायल को अपनी सेना पीछे हटाने की बात कही गई थी, लेकिन हमास इसके लिए कभी तैयार नहीं हुआ। अरब देशों ने भी इस प्लान का समर्थन तो किया, पर किसी ठोस प्रतिबद्धता के बिना। सऊदी अरब, मिस्र और यूएई जैसे देशों ने अमेरिकी दबाव में इसे “सद्भावना” के तौर पर स्वीकार किया, जबकि तुर्की और ईरान इससे नाखुश दिखे। गाजा के पुनर्निर्माण के लिए कौन जिम्मेदार होगा, यह भी स्पष्ट नहीं किया गया, जिससे योजना की विश्वसनीयता पर सवाल उठे।
यह भी देखेंःयूपी में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 46 IAS अधिकारियों के तबादले — 10 जिलों के बदले गए DM
वास्तविकता से दूर और जमीन पर अस्वीकार्य
वेस्ट बैंक में जारी हिंसा और इजरायली कार्रवाइयों ने सीजफायर की नींव को हिला दिया। इजरायल की नेतन्याहू सरकार युद्ध को राजनीतिक रूप से फायदेमंद मानती है, इसलिए कोई ठोस रियायत नहीं देना चाहती। ट्रंप की योजना में “इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स” भेजने का प्रस्ताव भी था, जिसे हमास ने अपनी संप्रभुता पर हमला बताया। इजरायल ने भी तुर्की की भागीदारी पर आपत्ति जताई। इस तरह, ट्रंप का सीजफायर “चाइनीज माल” साबित हुआ — दिखने में चमकदार, लेकिन टिकाऊ नहीं।