Trumps peace plan sparks controversy: रूस–यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पेश की गई कथित शांति योजना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने इस प्रस्ताव को कड़क शब्दों में खारिज कर दिया है, जबकि यूरोपीय देशों ने भी इसे स्वीकार करने से साफ मना कर दिया है। कनाडा के हैलीफैक्स इंटरनेशनल सिक्योरिटी फोरम में कई अमेरिकी सीनेटरों ने इस योजना को खतरनाक बताते हुए चेतावनी दी कि इससे रूस की आक्रामकता को बढ़ावा मिलेगा। इसी दौरान विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने सफाई दी कि ट्रंप के 28-बिंदुओं वाले इस प्रस्ताव को अमेरिका ने तैयार नहीं किया, बल्कि यह रूस की मांगों का संग्रह जैसा है, जिसे कीव पर थोपने की कोशिश की जा रही है।
रूसी शर्तों से भरा हुआ
सूत्रों का कहना है कि यह प्रस्ताव ट्रंप टीम और क्रेमलिन के बीच तैयार हुआ, जिसमें यूक्रेन की राय को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। प्रस्ताव में वे सभी शर्तें शामिल थीं जिन्हें जेलेंस्की कई बार नकार चुके हैं—जैसे पूर्वी यूक्रेन के बड़े हिस्से को रूस को सौंपना, नाटो सदस्यता छोड़ना और रूस को जी-8 में वापस शामिल करना। ट्रंप ने यहां तक कहा कि यूक्रेन को इसे 28 नवंबर तक स्वीकार करना चाहिए। सीनेटरों ने चेतावनी दी कि ऐसा करने से न केवल मॉस्को को उसका सैन्य लाभ मिलेगा, बल्कि चीन और उत्तर कोरिया जैसे देशों के लिए भी गलत संकेत जाएगा। कई विधायकों ने इस प्रस्ताव की तुलना 1938 के म्यूनिख समझौते से की, जिसे इतिहास में तुष्टीकरण की सबसे बड़ी गलती माना जाता है। रूबियो ने साफ किया कि यह "अमेरिका की योजना नहीं, बल्कि रूस की इच्छाओं का मसौदा" है।
अमेरिकी राजनीति में भी मतभेद बढ़े
रूबियो अब यूरोपीय नेताओं और यूक्रेन सरकार से चर्चा करने जिनेवा जा रहे हैं। अमेरिकी सीनेटरों ने इस प्रस्ताव को “खतरनाक रूसी एजेंडा” बताया, जबकि रिपब्लिकन नेता माइक राउंड्स ने कहा कि यह दस्तावेज ऐसा लगता है “जैसे रूसी भाषा में लिखा गया हो।” विवाद तब और बढ़ गया जब खुलासा हुआ कि ट्रंप प्रशासन की एक ब्लैकलिस्टेड रूसी अधिकारी से गुप्त बैठक हुई थी। वहीं, रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने इस प्रस्ताव का स्वागत करते हुए कहा कि यह “अंतिम शांति समझौते का आधार” बन सकता है, जिससे यूक्रेन और उसके सहयोगी और भी नाराज़ हो गए। विशेषज्ञों का कहना है कि यह योजना यूक्रेन की स्थायी सुरक्षा को नुकसान पहुंचाएगी और नया तनाव पैदा करेगी। इस पूरे विवाद ने अमेरिका के भीतर यूक्रेन नीति को लेकर गहरी राजनीतिक दरार को उजागर कर दिया है, जहां ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति को लेकर बहस तेज हो गई है।