आतंकी संगठनों के दावे अक्सर उनकी असली ताकत से ज्यादा प्रचार का हथियार होते हैं। हाल में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान द्वारा अपनी अलग ‘एयरफोर्स’ बनाने की बात सामने आई है, जिसने सुरक्षा विशेषज्ञों और आम लोगों के बीच सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या कोई गैर-सरकारी आतंकी संगठन सच में अपनी एयरफोर्स बना सकता है, या यह सिर्फ डर फैलाने की रणनीति है?
एयरफोर्स बनाने की कानूनी सच्चाई
अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक केवल संप्रभु राष्ट्रों को ही सैन्य एयरफोर्स रखने और संचालित करने का अधिकार होता है। हवाई क्षेत्र का नियंत्रण सीधे देश की संप्रभुता से जुड़ा होता है। हर सैन्य या नागरिक विमान का पंजीकरण किसी मान्यता प्राप्त देश के नाम पर होना जरूरी है। आतंकी संगठन न तो संप्रभु होते हैं और न ही उन्हें अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली होती है, इसलिए वे कानूनी रूप से एयरफोर्स नहीं बना सकते।
क्या आतंकी संगठन फाइटर जेट खरीद सकते हैं?
लड़ाकू विमान और सैन्य हेलीकॉप्टरों की बिक्री दुनिया में सबसे ज्यादा नियंत्रित हथियार सौदों में आती है। किसी भी खरीद के लिए यह साबित करना जरूरी होता है कि अंतिम उपयोगकर्ता एक वैध सरकार है। आतंकवादी समूह इस दायरे में नहीं आते, इसलिए उन्हें आधिकारिक तौर पर कोई भी देश या रक्षा कंपनी सैन्य विमान नहीं बेच सकती।
फिर हवाई ताकत कैसे जुटाते हैं आतंकी?
हालांकि आतंकी संगठनों के पास वैध एयरफोर्स नहीं होती, लेकिन वे दूसरे रास्तों से हवाई साधनों का इस्तेमाल करते हैं। कई बार संघर्ष के दौरान छोड़े गए या जब्त किए गए हेलीकॉप्टर और विमान उनके हाथ लग जाते हैं। इसके अलावा, हाल के वर्षों में कमर्शियल ड्रोन आतंकियों का नया हथियार बने हैं, जिन्हें निगरानी या हमलों के लिए बदला जाता है।
किसकी अनुमति से चलता है यह नेटवर्क
आतंकवादी संगठनों को कोई भी अंतरराष्ट्रीय संस्था हवाई संचालन की अनुमति नहीं देती। उन्हें मिलने वाले उपकरण, ट्रेनिंग या पुर्जे अवैध नेटवर्क, ब्लैक मार्केट या गुप्त समर्थन के जरिए आते हैं। इसलिए ‘एयरफोर्स’ जैसे दावे हकीकत से ज्यादा मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कोशिश माने जाते हैं।