
Trump's tariff policy: अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दूसरी पारी के सात महीनों के भीतर ही नौकरी बाजार कमजोर पड़ता दिख रहा है। अगस्त की जॉब रिपोर्ट के अनुसार, केवल 22,000 नई नौकरियां बनीं और बेरोजगारी दर 4.3% पर पहुंच गई, जो पिछले चार साल में सबसे ज्यादा है। रिपोर्ट बताती है कि फैक्ट्रियों, निर्माण और तेल-गैस क्षेत्र में हजारों नौकरियां खत्म हो चुकी हैं। ट्रंप ने चुनावी वादों में टैरिफ पॉलिसी को नौकरियों की वापसी का जरिया बताया था, लेकिन अब तक मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में करीब 50,000 से ज्यादा रोजगार घट चुके हैं।
महंगाई और कीमतों पर बढ़ा दबाव
ट्रंप ने सत्ता संभालते ही महंगाई कम करने और बिजली की दरें आधी करने का वादा किया था, लेकिन हालात उलटे साबित हुए हैं। अप्रैल में जहां सालाना महंगाई दर 2.3% थी, वहीं जुलाई में यह बढ़कर 2.7% हो गई। इसी साल बिजली के दामों में भी 4.6% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। टैरिफ नीतियों के कारण बड़ी कंपनियां जैसे वॉलमार्ट और प्रॉक्टर एंड गैंबल अपने उत्पाद महंगे करने को मजबूर हुईं। खराब आंकड़ों के लिए ट्रंप ने फेडरल रिजर्व पर उंगली उठाई और कहा कि अगर ब्याज दरें घटाई जातीं तो रोजगार बढ़ सकते थे। हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि ब्याज दरों में जल्दबाजी से कटौती करने से महंगाई और तेज हो सकती है।
आप्रवासन नीति और राजनीति पर असर
रोजगार संकट को और गहरा करने में ट्रंप की कड़ी आप्रवासन नीति भी अहम वजह मानी जा रही है। उन्होंने दावा किया था कि अवैध प्रवासियों को बाहर निकालने से ब्लैक समुदाय को अधिक रोजगार मिलेगा, लेकिन वास्तविकता में उनकी बेरोजगारी दर 7.5% तक पहुंच गई है, जो तीन साल का रिकॉर्ड है। श्रमिकों की कमी से कई उद्योग प्रभावित हो रहे हैं। इस बीच विपक्षी नेताओं ने ट्रंप की नीतियों को अर्थव्यवस्था के लिए घातक करार दिया है। सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन ने कहा कि "जॉब मार्केट बर्बाद हो रहा है", जबकि चक शूमर के मुताबिक "बेतरतीब फैसलों से अमेरिका की अर्थव्यवस्था डगमगा रही है।" वहीं, व्हाइट हाउस का दावा है कि हालिया आंकड़े अस्थायी हैं और आने वाले महीनों में स्थिति सुधर सकती है।