हनुमान जी भगवान शिव के रुद्रावतार माने जाते हैं और मंगलवार का दिन विशेष रूप से उनकी पूजा-अर्चना के लिए समर्पित है। मान्यता है कि हनुमान जी की भक्ति से जीवन के सभी भय दूर होते हैं और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। पूजा के समय उन्हें भोग के रूप में तुलसी दल अर्पित किया जाता है। तुलसी अर्पित करने से हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है, लेकिन इसके पीछे एक रोचक पौराणिक कथा भी छिपी हुई है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।
तुलसी अर्पित करने की परंपरा कैसे शुरू हुई?
रामायण में वर्णित कथा के अनुसार, वनवास से लौटने के बाद एक बार माता सीता हनुमान जी को भोजन करा रही थीं। उन्होंने प्रेम से कई प्रकार के स्वादिष्ट पकवान बनाए, जिन्हें हनुमान जी बड़े चाव से खाने लगे। लेकिन जैसे-जैसे वे खाते गए, उनकी भूख शांत होने का नाम ही नहीं ले रही थी। धीरे-धीरे पूरा भोजन समाप्त होने लगा, और हनुमान जी फिर भी और भोजन की मांग करते रहे। माता सीता हैरान और चिंतित हो गईं कि आखिर उनकी भूख क्यों नहीं मिट रही।
सीता–राम के संकेत से खुला रहस्य
जब यह स्थिति संभालना मुश्किल हो गया, तो माता सीता ने पूरी बात प्रभु श्रीराम को बताई। प्रभु ने मुस्कुराते हुए एक अद्भुत उपाय बताया उन्होंने कहा कि भोजन में एक तुलसी का पत्ता मिला दिया जाए। माता सीता ने ऐसा ही किया, और जैसे ही तुलसी मिली हुई थाली हनुमान जी के सामने रखी गई, उनकी भूख तुरंत शांत हो गई। तभी से यह परंपरा शुरू हुई कि हनुमान जी को भोग में तुलसी दल अवश्य अर्पित किया जाए। मान्यता है कि तुलसी अर्पित करने से उनकी कृपा शीघ्र प्राप्त होती है और मनोकामनाएँ पूरी होती हैं।
इसे भी पढ़ें : कोक्स बाजार में दिखा 'थ्रिलर' Pakistan U19 की रोमांचक जीत, Bangladesh को 13 रन से मात, अंतिम ओवरों में पलटा पूरा मैच
तुलसी का आध्यात्मिक महत्व
हिंदू धर्म में तुलसी को अत्यंत पवित्र माना गया है। भगवान विष्णु और उनके सभी अवतारों को तुलसी प्रिय है। श्रीराम को भी तुलसी अर्पित की जाती है। चूँकि हनुमान जी भगवान श्रीराम के परम भक्त हैं, इसलिए तुलसी का विशेष महत्व उनके लिए भी है। तुलसी भक्ति, पवित्रता और समर्पण का प्रतीक मानी जाती है। यही कारण है कि हनुमान जी को तुलसी अर्पित करने से भक्त को दुगुना लाभ मिलता है राम भक्ति का भी, और हनुमान जी की कृपा का भी।