ट्विशा शर्मा मौत मामले में न्यायिक हिरासत में भेजी गईं पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह इन दिनों भोपाल सेंट्रल जेल की महिला बैरक में कैदी नंबर 71 के रूप में दिन गुजार रही हैं। कभी अदालत में फैसले सुनाने वाली गिरिबाला अब खुद न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। जेल में बीत रहे उनके दिन और बदली परिस्थितियां इस चर्चित मामले को नया आयाम दे रही हैं।
न्याय की कुर्सी से जेल की बैरक तक का सफर
कुछ समय पहले तक गिरिबाला सिंह एक सम्मानित न्यायिक अधिकारी के रूप में जानी जाती थीं। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई मामलों की सुनवाई की और अनेक दोषियों को सजा सुनाई। वर्ष 2023 में सेवानिवृत्त होने के बाद उनका जीवन सामान्य रूप से आगे बढ़ रहा था, लेकिन ट्विशा शर्मा मौत मामले में नाम सामने आने के बाद परिस्थितियां पूरी तरह बदल गईं।
14 दिन की न्यायिक हिरासत में मां-बेटा
मामले में अदालत ने गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा है। दोनों फिलहाल भोपाल सेंट्रल जेल में अलग-अलग बैरकों में रखे गए हैं। जांच एजेंसियां मामले की विभिन्न पहलुओं से पड़ताल कर रही हैं, जबकि कानूनी प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ रही है।
सीमित सामान के साथ गुजर रहे दिन
जेल नियमों के तहत गिरिबाला सिंह का दैनिक जीवन अब सीमित संसाधनों के बीच गुजर रहा है। जेल सूत्रों के अनुसार उनके पास उपयोग के लिए एक कटोरी, एक चादर और एक शॉल उपलब्ध है। निर्धारित समय पर भोजन, बैरक की दिनचर्या और जेल के नियम अब उनके रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बन चुके हैं।
रातभर नहीं आई नींद, सुविधाओं की कर रहीं मांग
जानकारी के मुताबिक, जेल में शुरुआती दिनों के दौरान गिरिबाला सिंह मानसिक तनाव में दिखाई दी हैं। बताया जा रहा है कि उन्हें रात में नींद आने में कठिनाई हुई और उन्होंने उम्र तथा स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों का हवाला देते हुए कुछ अतिरिक्त सुविधाओं की मांग भी की है। जेल प्रशासन निर्धारित नियमों के अनुसार व्यवस्था बनाए हुए है।
समय के फेर की चर्चा में गिरिबाला सिंह
ट्विशा शर्मा मौत मामले में आरोपी के रूप में न्यायिक हिरासत में पहुंचीं गिरिबाला सिंह की कहानी को लोग समय और परिस्थितियों के बड़े बदलाव के रूप में भी देख रहे हैं। एक समय अदालत में न्यायिक निर्णय देने वाली पूर्व जज आज खुद कानूनी प्रक्रिया का सामना कर रही हैं। हालांकि मामले में अंतिम फैसला अभी आना बाकी है और आरोपों की सत्यता का निर्धारण न्यायालय द्वारा किया जाएगा।