ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला अब नए और गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आए छह गंभीर घावों को बेहद अहम मानते हुए आरोपी और रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द कर दी है। अदालत ने साफ संकेत दिए हैं कि यह मामला केवल आत्महत्या का नहीं लग रहा। अब जांच एजेंसियों की नजर उन चोटों और मौत से पहले हुई घटनाओं पर टिकी है, जिन्होंने पूरे केस को और रहस्यमय बना दिया है।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी से बढ़ी मुश्किलें
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि मृतका के शरीर पर मिले घाव बेहद गंभीर हैं और उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने माना कि निचली अदालत ने जांच से जुड़े अहम तथ्यों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया। इसी आधार पर आरोपी को मिली अग्रिम जमानत को रद्द कर दिया गया। कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद अब जांच एजेंसियों के लिए हिरासत में पूछताछ का रास्ता साफ हो गया है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खड़े किए कई सवाल
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ट्विशा शर्मा के शरीर पर छह एंटेमॉर्टम इंजरी यानी मौत से पहले लगी चोटों का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार हाथों, उंगलियों और सिर पर चोट के स्पष्ट निशान मिले हैं। डॉक्टरों की राय में ये चोटें सामान्य परिस्थितियों में नहीं लगीं और न ही शव को फंदे से उतारने या अस्पताल ले जाने के दौरान आईं। इन तथ्यों ने आत्महत्या की थ्योरी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अंदरूनी चोटों ने बढ़ाया शक
जांच में सामने आया कि ट्विशा के फेफड़ों में भारी सूजन और खून का जमाव पाया गया था। इसके अलावा आंखों में बारीक ब्लीडिंग के संकेत भी मिले हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे संकेत कई बार संघर्ष, दबाव या प्रताड़ना जैसी परिस्थितियों की ओर इशारा करते हैं। यही कारण है कि अब यह मामला सिर्फ एक सामान्य मौत का नहीं माना जा रहा, बल्कि हर पहलू को गंभीरता से जांचा जा रहा है।
दूसरी ऑटोप्सी रिपोर्ट पर टिकी नजर
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए डॉक्टरों की विशेष टीम द्वारा दूसरी ऑटोप्सी भी कराई गई है। अब सभी की नजर इस विस्तृत रिपोर्ट पर टिकी है, क्योंकि इससे मौत की असली वजह और शरीर पर मिले घावों की सच्चाई और स्पष्ट हो सकती है। जांच एजेंसियां उम्मीद कर रही हैं कि नई रिपोर्ट कई अनसुलझे सवालों के जवाब दे सकती है।
कानूनी कार्रवाई होगी और सख्त
हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब पूरा मामला भारतीय न्याय संहिता और दहेज प्रतिषेध कानून के तहत आगे बढ़ेगा। अदालत ने साफ किया है कि संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामलों में जांच को कमजोर नहीं पड़ने दिया जा सकता। आने वाले दिनों में इस केस में कई बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।