भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में सीबीआई की जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। अब जांच के केंद्र में एक मोबाइल फोन, गायब सिम कार्ड और घटना से जुड़े बयानों में संभावित विरोधाभास आ गए हैं। जांच एजेंसी मामले की हर कड़ी को जोड़ने में जुटी है और साक्ष्यों के आधार पर घटनाक्रम को समझने की कोशिश कर रही है। इसी क्रम में पूर्व जज गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह से गहन पूछताछ की जा रही है।
11 दिन बाद सामने आया मोबाइल फोन
जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि एक मोबाइल फोन घटना के 11 दिन बाद पुलिस को सौंपा गया। जानकारी के अनुसार यह फोन गिरिबाला सिंह द्वारा उपलब्ध कराया गया था, लेकिन उसमें सिम कार्ड मौजूद नहीं था। इसी बिंदु को लेकर जांच एजेंसी कई सवालों के जवाब तलाश रही है। जांचकर्ताओं का फोकस यह समझने पर है कि यह फोन शुरुआती जांच का हिस्सा क्यों नहीं बना और सिम कार्ड कहां गया।
डिजिटल साक्ष्यों पर जांच एजेंसी की नजर
मामले की जांच में डिजिटल साक्ष्य महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इससे पहले यह भी सामने आया था कि समर्थ सिंह के मोबाइल से कई संदेश हटाए गए थे। ऐसे में जांच एजेंसी अब मोबाइल डेटा, कॉल रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की गहन पड़ताल कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल रिकॉर्ड मामले की कई महत्वपूर्ण कड़ियों को स्पष्ट कर सकते हैं।
गिरिबाला सिंह से पूछे गए कई अहम सवाल
सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसी ने गिरिबाला सिंह से एफआईआर में लगाए गए आरोपों और उनकी भूमिका को लेकर कई सवाल किए हैं। पूछताछ के दौरान उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार बताया। साथ ही उन्होंने यह आशंका भी जताई कि गर्भपात के बाद मानसिक तनाव की स्थिति ने ट्विशा को प्रभावित किया हो सकता है। हालांकि जांच एजेंसी सभी बयानों का स्वतंत्र रूप से परीक्षण कर रही है।
50 से ज्यादा सवालों की सूची तैयार
सीबीआई ने गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह से पूछताछ के लिए 50 से अधिक सवाल तैयार किए हैं। दोनों के बयानों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर आमने-सामने बैठाकर भी पूछताछ की जा सकती है। जांच एजेंसी उन सभी तथ्यों का मिलान कर रही है जो अब तक सामने आए हैं।
डमी के जरिए होगा घटनास्थल का रीक्रिएशन
मामले की तह तक पहुंचने के लिए जांच एजेंसी ने ट्विशा की लंबाई और वजन के अनुरूप एक डमी तैयार कराई है। इस डमी की मदद से घटनास्थल का रीक्रिएशन किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि घटना को लेकर बताए गए घटनाक्रम वास्तविक परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों से कितना मेल खाते हैं। फिलहाल जांच जारी है और एजेंसी हर पहलू को बारीकी से परख रही है।