भोपाल की चर्चित एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा डेथ केस की जांच कर रही सीबीआई अब मामले की हर कड़ी को जोड़ने में जुटी है। मेडिकल रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्य और शुरुआती जांच से जुड़े दस्तावेजों की गहन पड़ताल की जा रही है। इसी बीच मामले में नया मोड़ तब आया, जब रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह की ओर से हाईकोर्ट में पेश दस्तावेजों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। ट्विशा के परिजनों के वकील अंकुर पांडे का आरोप है कि जांच से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य और दस्तावेज पहले ही आरोपियों तक पहुंच रहे थे, जिससे गिरिबाला सिंह को अग्रिम जमानत हासिल करने में मदद मिली।
प्रारंभिक जांच करने वाले एसआई की भूमिका पर संदेह
सीबीआई सूत्रों के अनुसार, मामले की शुरुआती जांच करने वाले कटारा हिल्स थाने के एसआई दिनेश शर्मा से दोबारा पूछताछ की जा सकती है। वकील अंकुर पांडे का दावा है कि 13 मई 2026 को दिनेश शर्मा घटनास्थल पहुंचे और गिरिबाला सिंह तथा समर्थ सिंह की मौजूदगी में रस्सी जब्त की। हालांकि जब्ती पत्रक में किसी स्वतंत्र गवाह को शामिल नहीं किया गया और न ही रस्सी की पहचान करने वाले व्यक्ति का नाम दर्ज किया गया।
तीन दिन बाद डॉक्टरों को सौंपी गई रस्सी
परिजनों के वकील के मुताबिक, जब्त की गई रस्सी को तत्काल एम्स के डॉक्टरों को सौंपने के बजाय एसआई ने अपनी कार में रखा। 14 मई को परिजनों के विरोध के बाद 15 मई को रस्सी डॉक्टरों को दी गई। बाद में 16 मई को इसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया। वकील का कहना है कि साक्ष्य संग्रहण की प्रक्रिया में यह गंभीर चूक है और शुरुआत में ही गिरिबाला व समर्थ को संदिग्ध मानकर जांच की जानी चाहिए थी।
केस डायरी के दस्तावेज आरोपियों तक पहुंचने के आरोप
मामले में सबसे बड़ा सवाल उन दस्तावेजों को लेकर उठ रहा है, जो गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत याचिका के दौरान हाईकोर्ट में पेश किए गए थे। वकील अंकुर पांडे का आरोप है कि रस्सी जब्ती से जुड़ा दस्तावेज केस डायरी का हिस्सा था और कानूनी रूप से इसकी पहुंच केवल जांच एजेंसी तक होनी चाहिए थी। इसके बावजूद यह दस्तावेज अदालत में पेश किया गया, जिससे जांच प्रक्रिया की गोपनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
मेडिकल दस्तावेजों की भी जांच कर रही CBI
सीबीआई अब उन मेडिकल दस्तावेजों की भी सत्यता जांच रही है, जिन्हें गिरिबाला सिंह की ओर से अदालत में पेश किया गया था। इन दस्तावेजों में दावा किया गया था कि ट्विशा मानसिक तनाव और मनोरोग संबंधी समस्याओं से जूझ रही थीं। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि वास्तव में उनका कोई इलाज हुआ था या नहीं। इसी सिलसिले में मनोचिकित्सक डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी से भी पूछताछ की गई है। सीबीआई अब साक्ष्यों की जब्ती, उनकी सुरक्षा और पूरी जांच प्रक्रिया की समीक्षा कर रही है।