TWISHA SHARMA CASE POSTMORTEM REPORT ----भोपाल के ट्विशा शर्मा मौत मामले में सीबीआई की चार्जशीट दाखिल होने के बाद एक बार फिर पोस्टमार्टम रिपोर्ट चर्चा में आ गई है। ट्विशा पक्ष के वकील ने भोपाल और दिल्ली एम्स की रिपोर्ट में शरीर पर मिली चोटों के आकलन को लेकर सवाल उठाए हैं। दोनों रिपोर्ट मौत की वजह दम घुटना बताती हैं, लेकिन चोटों की प्रकृति और उनके समय को लेकर अंतर होने का दावा किया गया है।
पहली रिपोर्ट में दर्ज थीं सात एंटी-मॉर्टम चोटें
वकील के मुताबिक शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ट्विशा के शरीर पर सात ऐसी चोटें दर्ज थीं, जिन्हें मौत से पहले की चोटें माना गया था। 18 मई को एम्स भोपाल की ओर से दिए गए जवाब में चोटों का अलग-अलग परीक्षण किया गया। गर्दन पर मिले दो छोटे लाल निशानों को फंदे के रगड़ने या खिसकने से बनने की संभावना बताई गई थी, जबकि इन्हें नाखून या उंगलियों के दबाव के निशान नहीं माना गया।
कलाई और हाथ के निशानों पर भी सवाल
रिपोर्ट के अनुसार बाएं हाथ और कलाई पर मिले नीले निशानों को एक से तीन दिन पुराना बताया गया था। वहीं वकील का दावा है कि शुरुआती रिपोर्ट में कलाई और उंगलियों पर कुछ चोटें ताजा दिखाई दी थीं और उनके मौत से कुछ समय पहले लगने की संभावना जताई गई थी। रिपोर्ट में संघर्ष या हाथापाई की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किए जाने की बात भी सामने आई है।
दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट बनी जांच का अहम आधार
सीबीआई की चार्जशीट में दिल्ली एम्स की दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट को प्रमुख आधार बनाए जाने की बात कही गई है। हालांकि दोनों पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह दम घुटना ही बताई गई है। ट्विशा पक्ष के वकील ने दोनों रिपोर्ट में चोटों की व्याख्या को लेकर अंतर का मुद्दा उठाया है। यही अंतर अब मामले में आगे की कानूनी बहस का अहम हिस्सा बन सकता है।
परिवार ने जताई रिपोर्ट को लेकर आपत्ति
ट्विशा की मां पहले ही अपनी बेटी की मौत को लेकर गंभीर सवाल उठा चुकी हैं। वहीं ससुराल पक्ष की गिरिबाला को लेकर भी परिवार की ओर से कुछ आरोप लगाए गए हैं। ट्विशा की मां ने दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर भी सवाल उठाए थे। दूसरी ओर, मामले में दहेज की मांग और दहेज मृत्यु के पहलू की जांच जारी बताई गई है।
आईफोन और डीवीआर से खुल सकते हैं कई राज
ट्विशा की मौत 12 मई को कटारा हिल्स थाना क्षेत्र स्थित ससुराल में हुई थी। मायके पक्ष की शिकायत के बाद दोबारा पोस्टमार्टम कराया गया और जांच सीबीआई को सौंपी गई। मामले में गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह जेल में बंद हैं। जांच के दौरान ट्विशा का आईफोन, घर का डीवीआर और आरोपियों की आवाज के फोरेंसिक परीक्षण को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इनकी रिपोर्ट से घटनाक्रम को समझने में अहम जानकारी सामने आ सकती है।