भोपाल की अभिनेत्री और मॉडल ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत अब देश की सबसे बड़ी अदालत तक पहुंच चुकी है। शादी के सिर्फ पांच महीने बाद ससुराल में हुई मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। परिवार लगातार हत्या, दहेज प्रताड़ना और जांच में लापरवाही के आरोप लगा रहा है। बढ़ते विवाद और सार्वजनिक दबाव के बीच सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मामले की सुनवाई तय कर दी है, जिससे केस ने नया मोड़ ले लिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने खुद संभाला मामला
ट्विशा शर्मा केस को सुप्रीम कोर्ट ने बेहद गंभीर मानते हुए स्वतः संज्ञान लिया है। मामले की सुनवाई 25 मई को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ करेगी। कोर्ट इस बात पर भी नजर रखेगा कि जांच प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से हुई या नहीं। शीर्ष अदालत ने मामले को “वैवाहिक घर में युवती की अप्राकृतिक मौत” से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा माना है।
पांच महीने की शादी और फिर संदिग्ध मौत
12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स स्थित ससुराल में ट्विशा शर्मा मृत मिली थीं। उनकी शादी वकील समर्थ सिंह से कुछ महीने पहले ही हुई थी। परिवार का आरोप है कि शादी के बाद से ही उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। परिजनों ने पति और सास पर हत्या तथा दहेज उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि आरोपी पक्ष इसे आत्महत्या बता रहा है।
फोरेंसिक रिपोर्ट और CCTV पर बढ़ा विवाद
मामले में सबसे ज्यादा सवाल जांच और सबूतों को लेकर उठ रहे हैं। शुरुआती पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में आत्महत्या की बात कही गई थी, लेकिन बाद में शरीर पर चोटों और गले पर अलग-अलग निशानों की चर्चा ने केस को और उलझा दिया। CCTV फुटेज, FIR में देरी और जांच पर प्रभाव डालने जैसे आरोपों ने पूरे मामले को राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया है।
आरोपी पति पुलिस रिमांड में, सास पर भी नजर
एफआईआर दर्ज होने के बाद आरोपी पति समर्थ सिंह कई दिनों तक पुलिस की पकड़ से बाहर रहा। बाद में उसे अदालत में पेश किया गया, जहां से सात दिन की पुलिस रिमांड मिली। अब पुलिस उससे घटना की रात, कॉल रिकॉर्ड, चैट और पारिवारिक विवादों को लेकर पूछताछ करेगी। दूसरी ओर आरोपी सास गिरिबाला सिंह की भूमिका को लेकर भी लगातार सवाल उठ रहे हैं।
महिला आयोग और सरकार भी एक्टिव
राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी मामले का स्वतः संज्ञान लेकर प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। वहीं मध्य प्रदेश सरकार ने हाई कोर्ट में आरोपी सास की अग्रिम जमानत रद्द करने की मांग की है। सरकार की ओर से वरिष्ठ कानूनी टीम अदालत में पक्ष रख रही है। अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और आगे आने वाली जांच रिपोर्ट पर टिकी है।