Two Congress councillors: मध्य प्रदेश के इंदौर में वंदे मातरम् गाने को लेकर विवाद गहरा गया है। नगर निगम के बजट सत्र के दौरान कांग्रेस की दो महिला पार्षदों—रुबीना इकबाल खान और फौजिया शेख अलीम—ने वंदे मातरम् गाने से इनकार कर दिया, जिसके बाद मामला तूल पकड़ गया। इस घटना के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया और विरोध-प्रदर्शन के बीच पुलिस ने दोनों पार्षदों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई
यह पूरा मामला नगर निगम के बजट सत्र के दौरान सामने आया, जब सदन में वंदे मातरम् गाया जा रहा था। आरोप है कि दोनों पार्षदों ने इसमें भाग लेने से इनकार किया। इस पर अन्य पार्षदों, खासकर बीजेपी सदस्यों ने आपत्ति जताई और इसे राष्ट्र भावना से जुड़ा मुद्दा बताते हुए कार्रवाई की मांग की।
शिकायत और जांच
बीजेपी पार्षदों ने इस घटना के बाद संभागायुक्त और एमजी रोड थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू की, जिसमें संबंधित पार्षदों के बयान दर्ज किए गए और अन्य गवाहों से भी पूछताछ की गई। जांच के बाद आरोपों को प्रथम दृष्टया सही मानते हुए दोनों के खिलाफ धारा 196/1 के तहत मामला दर्ज किया गया।
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हंगामा और कार्रवाई
घटना के दौरान सदन में काफी हंगामा हुआ। बताया गया कि फौजिया शेख अलीम वंदे मातरम् गाए जाने के समय अनुपस्थित थीं और बाद में आकर उन्होंने कार्यवाही में व्यवधान डाला। उनके कथित आपत्तिजनक बयान के चलते स्पीकर ने उन्हें एक दिन के लिए सदन से निष्कासित कर दिया।
धार्मिक स्वतंत्रता का तर्क
फौजिया शेख अलीम ने अपने पक्ष में कहा कि उनका धर्म उन्हें वंदे मातरम् गाने की अनुमति नहीं देता। उन्होंने संविधान द्वारा दिए गए धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का हवाला देते हुए कहा कि किसी को भी उन्हें यह गीत गाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। यह बयान अब इस पूरे विवाद को संवैधानिक और धार्मिक अधिकारों की बहस में भी बदल रहा है।