पाकिस्तान की आर्थिक हालत पहले से ही दबाव में है और अब संयुक्त अरब अमीरात की एक डेडलाइन ने उसकी टेंशन और बढ़ा दी है। यूएई ने पाकिस्तान को दिए गए 2 अरब डॉलर के कर्ज को सिर्फ 30 दिन के लिए आगे बढ़ाया है। इस रकम को मौजूदा 6.5 फीसदी ब्याज दर के साथ लौटाने की शर्त रखी गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह कर्ज 1-1 अरब डॉलर के दो हिस्सों में था, जिसकी अवधि जनवरी में ही पूरी हो चुकी थी।
कर्ज की शर्तें और पाकिस्तान की मांग
पाकिस्तान की सरकार चाहती है कि इस कर्ज को कम से कम दो साल के लिए रोलओवर कर दिया जाए। इसके साथ ही वह ब्याज दर भी घटाकर करीब 3 फीसदी कराने की कोशिश में है। लेकिन यूएई ने इस मांग पर फिलहाल कोई नरमी नहीं दिखाई है। यूएई ने साफ कर दिया है कि अभी केवल एक महीने का ही समय मिलेगा, ताकि आगे की बातचीत हो सके।
30 दिन में पैसा चुकाना क्यों है बड़ी चुनौती
पाकिस्तान के लिए इतनी बड़ी रकम एक साथ चुकाना आसान नहीं है। अगर यह पैसा लौटाया जाता है, तो देश के लिए एक बड़ा फाइनेंसिंग गैप पैदा हो जाएगा। इसे भरने के लिए पाकिस्तान को दूसरे देशों या संस्थानों से नए कर्ज की तलाश करनी पड़ेगी। मौजूदा हालात में विदेशी मुद्रा भंडार भी ज्यादा मजबूत नहीं है, जिससे चिंता और गहरी हो गई है।
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UAE के सख्त रुख के पीछे की वजह
विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्रीय राजनीति भी यूएई के इस सख्त रवैये की एक वजह हो सकती है। यमन से जुड़े मुद्दों पर सऊदी अरब और यूएई के बीच मतभेदों में पाकिस्तान का झुकाव सऊदी अरब की ओर माना जा रहा है। इसी कारण यूएई अब पाकिस्तान को लेकर ज्यादा सतर्क और सख्त नजर आ रहा है।
शहबाज सरकार के सामने सीमित विकल्प
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार के पास फिलहाल ज्यादा विकल्प नहीं हैं। एक रास्ता यूएई से फिर से समय बढ़ाने की गुहार लगाना है, दूसरा किसी और देश या अंतरराष्ट्रीय संस्था से तात्कालिक मदद लेना। लेकिन दोनों ही रास्ते आसान नहीं दिखते।
IMF और दूसरे देशों से जुड़ी उम्मीद
पाकिस्तान इस वक्त अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के 7 अरब डॉलर के प्रोग्राम पर भी टिका हुआ है। इस प्रोग्राम के तहत यूएई, सऊदी अरब और चीन ने सितंबर तक पाकिस्तान के सेंट्रल बैंक में रकम बनाए रखने का वादा किया है। अब सवाल यही है कि क्या संयुक्त अरब अमीरात पाकिस्तान की अपील पर नरमी दिखाएगा या फिर शहबाज सरकार को एक महीने में 2 अरब डॉलर जुटाने की मुश्किल चुनौती का सामना करना पड़ेगा।