UAE India Investment Plan : भारत और संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई के बीच आर्थिक रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं। दोनों देशों के बीच निवेश और कारोबार को बढ़ाने की दिशा में कई बड़े कदम उठाए जा रहे हैं। यूएई ने भारत में आने वाले समय में करीब 25 अरब डॉलर का अतिरिक्त निवेश करने का इरादा जताया है। लंबे समय में दोनों देश यूएई के भारत में कुल निवेश को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने की दिशा में काम कर रहे हैं। इस निवेश का दायरा पारंपरिक कारोबार से आगे बढ़कर जहाज निर्माण, बंदरगाह, अंतरिक्ष, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, वित्तीय तकनीक और नए उद्यमों तक होगा।
भारत में अब तक इतना निवेश
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के मुताबिक, यूएई अब तक भारत में करीब 25 अरब डॉलर का निवेश कर चुका है। भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश करने वाले प्रमुख देशों में यूएई सातवें स्थान पर है। अब दोनों देश निवेश के स्तर को और बढ़ाने की तैयारी में हैं। यूएई की नजर भारतीय बंदरगाहों, जहाज निर्माण, अंतरिक्ष क्षेत्र, नए उद्यमों और शेयर बाजार से जुड़े अवसरों पर भी है। इससे इन क्षेत्रों में पूंजी और कारोबारी सहयोग बढ़ सकता है।
जहाज निर्माण पर खास नजर
भारत अगले दशक में अपनी बंदरगाह क्षमता को दोगुना करने की योजना पर काम कर रहा है। ऐसे में यूएई के लिए भारतीय बंदरगाह और समुद्री क्षेत्र में निवेश के अवसर बढ़ रहे हैं। दोनों देश जहाजरानी क्षेत्र से जुड़े छह प्रमुख क्षेत्रों में अलग-अलग कार्य समूह बनाने की योजना पर भी काम कर रहे हैं। इनमें जहाजों का स्वामित्व, आधुनिक बंदरगाहों का विकास, जहाज निर्माण, जहाजों की मरम्मत और रखरखाव, जहाज तोड़ना तथा कंटेनर निर्माण शामिल हैं। महाराष्ट्र के वधावन बंदरगाह के अलावा देश के पूर्वी और पश्चिमी तट पर भी सहयोग की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।
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कृत्रिम बुद्धिमत्ता में भी निवेश
यूएई का निवेश केवल बंदरगाह और बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं रहेगा। दोनों देश कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई, वित्तीय तकनीक और दूसरी उभरती तकनीकों में सहयोग बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं। यूएई की भारतीय नए उद्यम व्यवस्था में भी निवेश बढ़ाने में दिलचस्पी है। इससे तकनीकी कंपनियों और नए कारोबारों को अंतरराष्ट्रीय पूंजी मिलने के रास्ते खुल सकते हैं।
2032 तक व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य
भारत और यूएई के बीच व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने में व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते की भी अहम भूमिका है। यह समझौता चार साल पहले लागू हुआ था। इसके बाद दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार बढ़कर करीब 100 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। अब भारत और यूएई ने वर्ष 2032 तक दोनों देशों के बीच व्यापार को 200 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। निवेश के साथ व्यापार बढ़ाने की यह योजना दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को और व्यापक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।