उदयपुर में एक आईटी कंपनी के सीईओ की बर्थडे और न्यू ईयर पार्टी एक महिला मैनेजर के लिए भयावह सपने में बदल गई। 20 दिसंबर की रात होटल में आयोजित पार्टी में वह सामान्य माहौल में शामिल हुई थी। शराब का दौर चला, म्यूजिक और जश्न का माहौल था। लेकिन पार्टी खत्म होने के बाद हालात अचानक बदल गए। भरोसे के रिश्तों के बीच महिला को ऐसी साजिश में फंसा दिया गया, जिसने उसकी जिंदगी को हमेशा के लिए बदल दिया। यह मामला सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि ऑफिस कल्चर और महिलाओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
आफ्टर पार्टी के बहाने रची गई साजिश
पार्टी के बाद जब महिला घर जाना चाहती थी, तब कंपनी की महिला एग्जीक्यूटिव ने ‘आफ्टर पार्टी’ का प्रस्ताव दिया। भरोसे के चलते वह मान गई। उसे कार में बैठाया गया, जहां सीईओ जितेश सिसोदिया और एक अन्य दंपती पहले से मौजूद थे। रास्ते में कार रुकी और स्मोकिंग से जुड़ा सामान लिया गया। आरोप है कि महिला को जबरन स्मोक कराया गया, जिससे वह धीरे-धीरे बेहोश होने लगी। यह सब एक सोची-समझी योजना का हिस्सा था, ताकि महिला कमजोर हो जाए और विरोध न कर सके।
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चलती कार में दरिंदगी और बेहोशी का खेल
महिला के अनुसार, नशीले प्रभाव में वह अपना संतुलन खो बैठी। बीच-बीच में होश आने पर उसे अपने साथ हो रही दरिंदगी का अहसास हुआ। उसने विरोध किया, लेकिन आरोपियों ने उसकी एक न सुनी। आरोप है कि रात करीब 1:45 बजे से सुबह 5 बजे तक चलती कार में उसके साथ गैंगरेप किया गया। कार शहर की सड़कों पर घूमती रही। सुबह उसे बदहवास हालत में घर के पास छोड़ दिया गया। जब पूरी तरह होश आया, तब शरीर पर दर्द, चोटों और गायब कपड़ों ने सच्चाई सामने रख दी।
डैशकैम बना सबसे बड़ा सबूत, आरोपी गिरफ्तार
महिला को याद आया कि कार में डैशकैम लगा था। रिकॉर्डिंग में बातचीत और आवाजें कैद थीं, जो घटना की पुष्टि करती हैं। यही सबूत पुलिस जांच की सबसे मजबूत कड़ी बना। 23 दिसंबर को शिकायत दर्ज हुई और मेडिकल जांच में गंभीर चोटों के निशान मिले। 25 दिसंबर को पुलिस ने सीईओ समेत तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। यह मामला दिखाता है कि तकनीकी सबूत और पीड़िता की हिम्मत कैसे ताकतवर लोगों को भी कटघरे में ला सकती है। अब पूरे देश की नजरें इस केस में इंसाफ पर टिकी हैं।