यूजीसी के नए नियमों को लेकर देशभर में चल रहे विरोध के बीच नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद का बयान सामने आते ही सियासत की धुरी बदल गई। जहां एक तरफ छात्र और सवर्ण संगठन सड़कों पर हैं वहीं चंद्रशेखर आजाद खुलकर यूजीसी नियमों के समर्थन में आ गए हैं। उन्होंने साफ कहा कि इस नियम का विरोध करने वाले लोग जनता को गुमराह कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह नियम कमजोर नहीं बल्कि और सख्त होने चाहिए। उनके इस बयान ने पूरे मुद्दे को दो हिस्सों में बांट दिया है।
यूजीसी नियमों को लेकर चंद्रशेखर का तर्क
चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि यूजीसी की गाइडलाइंस को लेकर लोगों को खुद ठीक से जानकारी नहीं है। बेवजह डर फैलाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग विरोध कर रहे हैं वही सालों से एससी एसटी और ओबीसी छात्रों के साथ भेदभाव करते आए हैं। आगरा की रैली में भी उन्होंने कहा था कि यह नियम उन लोगों को परेशान कर रहा है जो आज भी शिक्षा व्यवस्था में दबदबा बनाए रखना चाहते हैं।
रोहित वेमुला और पायल तड़वी का जिक्र
चंद्रशेखर ने इस मुद्दे को सिर्फ कानून तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने रोहित वेमुला और पायल तड़वी का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर ऐसे नियम पहले होते तो शायद हालात अलग होते। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि अगर दबाव में आकर यूजीसी नियम वापस लिए गए तो बहुजन समाज सड़कों पर उतर आएगा। उनका कहना है कि यह लड़ाई सम्मान और बराबरी की है।
छात्रों और सवर्ण संगठनों का उग्र विरोध
दूसरी तरफ यूपी के कई जिलों में छात्रों का गुस्सा साफ दिख रहा है। इलाहाबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी में छात्रों ने धरना दिया। बलिया में छात्र और अधिवक्ता सड़कों पर उतरे। वाराणसी की काशी विद्यापीठ में कक्षाएं बंद कर दी गईं। छात्रों का कहना है कि यह नियम शिक्षा को बांटने का काम करेगा और झूठे आरोपों का रास्ता खोलेगा।
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बीजेपी के भीतर बढ़ी बेचैनी
यूजीसी नियमों को लेकर बीजेपी के भीतर भी हलचल तेज हो गई है। बहराइच में युवा मोर्चा के नगर मंत्री ने इस्तीफा दे दिया। आगरा और अमेठी से विरोध के अलग अलग तरीके सामने आए। बीजेपी के कुछ नेताओं ने संशोधन की मांग भी शुरू कर दी है। वहीं बरेली में एसडीएम अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा सरकार की परेशानी और बढ़ा रहा है।
आगे क्या होगा सरकार का फैसला
अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। अगर नियम वापस लिए गए तो बहुजन समाज के आंदोलन का खतरा है। अगर नियम लागू रहे तो सवर्ण समाज और छात्रों का विरोध और तेज होगा। चंद्रशेखर आजाद के समर्थन के बाद यह साफ हो गया है कि यूजीसी नियम अब सिर्फ शिक्षा का मुद्दा नहीं रहे। यह सामाजिक और राजनीतिक महासंग्राम बन चुका है। आने वाले दिन तय करेंगे कि सरकार किस तरफ खड़ी होती है।