Aadhaar App Verification : होटल में कमरा बुक कराने या अस्पताल में इलाज करवाने के दौरान आधार कार्ड की फोटोकॉपी देना आम बात है। लेकिन अब इस प्रक्रिया में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) डिजिटल आधार वेरिफिकेशन को बढ़ावा दे रहा है। इसके तहत होटल, अस्पताल और अन्य संस्थान आधार ऐप के जरिए लोगों की पहचान सत्यापित कर सकेंगे। इस व्यवस्था का मकसद कागजी दस्तावेजों पर निर्भरता कम करना और लोगों की निजी जानकारी को सुरक्षित रखना है।
UIDAI क्यों बदल रहा है वेरिफिकेशन का तरीका?
UIDAI डिजिटल पहचान सत्यापन को बढ़ावा देकर आधार की फोटोकॉपी जमा करने की जरूरत कम करना चाहता है। अभी होटल, अस्पताल और कई अन्य जगहों पर पहचान के प्रमाण के तौर पर आधार की कॉपी मांगी जाती है। नई व्यवस्था में संस्थान डिजिटल तरीके से पहचान की पुष्टि कर सकेंगे। इससे लोगों को हर जगह आधार की फोटोकॉपी साथ रखने या जमा करने की परेशानी से राहत मिल सकती है।
आधार ऐप से होगी पहचान की पुष्टि
नई व्यवस्था के तहत लोग आधार ऐप के माध्यम से अपनी पहचान सत्यापित करा सकेंगे। होटल में चेक-इन या अस्पताल में पंजीकरण के दौरान पहचान की जांच डिजिटल तरीके से की जा सकेगी। इसका उद्देश्य पारंपरिक दस्तावेजों की जगह अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक प्रक्रिया उपलब्ध कराना है। हालांकि, यह व्यवस्था संबंधित संस्थानों की डिजिटल वेरिफिकेशन सुविधा अपनाने पर निर्भर करेगी।
300 संस्थान जुड़े ऑफलाइन सिस्टम से
जानकारी के मुताबिक, UIDAI ने जनवरी से अब तक करीब 300 संस्थानों को अपने ऑफलाइन वेरिफिकेशन सिस्टम से जोड़ा है। इनमें होटल, अस्पताल और अन्य संस्थान शामिल हैं। इस व्यवस्था के जरिए संस्थान आधार के मुख्य डेटाबेस से सीधे जुड़े बिना भी पहचान की पुष्टि कर सकते हैं। इससे डिजिटल वेरिफिकेशन का दायरा बढ़ाने में मदद मिलेगी।
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यूजर तय करेंगे कौन सी जानकारी साझा हो
आधार ऐप की एक अहम सुविधा यह है कि इसमें यूजर की सहमति को महत्व दिया जाएगा। लोग अपनी जरूरत के मुताबिक केवल जरूरी जानकारी ही संबंधित संस्थान के साथ साझा कर सकेंगे। यानी पहचान साबित करने के लिए हर बार अपनी पूरी व्यक्तिगत जानकारी देना जरूरी नहीं होगा। इससे लोगों को अपनी जानकारी साझा करने पर अधिक नियंत्रण मिल सकेगा।
आधार नंबर और निजी जानकारी रहेगी सुरक्षित
इस डिजिटल प्रक्रिया में होटल या अस्पताल के साथ आधार नंबर साझा करने की जरूरत नहीं होगी। साथ ही पहचान सत्यापन के लिए संस्थानों को UIDAI के केंद्रीय डेटाबेस से सीधे जुड़ना भी जरूरी नहीं होगा। इससे आधार की फोटोकॉपी जमा करने के दौरान निजी जानकारी के गलत इस्तेमाल का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है। कुल मिलाकर, डिजिटल वेरिफिकेशन से पहचान साबित करना आसान हो सकता है और लोगों की व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा को भी मजबूती मिल सकती है।