भीषण गर्मी से जूझ रहे मध्यप्रदेश में जहां आम लोग 40 डिग्री तापमान में घरों से निकलने से बच रहे हैं, वहीं धर्मनगरी उज्जैन में एक संत की अनोखी अग्नि तपस्या लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है। नारायण-नारायण गौसेवा आश्रम में बाबा भरत दास जी आग की लपटों के बीच बैठकर साधना कर रहे हैं। उनकी यह तपस्या न सिर्फ आस्था बल्कि आत्मसंयम और दृढ़ विश्वास का प्रतीक बन गई है।
अग्नि के बीच साधना का अद्भुत दृश्य
उज्जैन के विष्णु सागर क्षेत्र स्थित आश्रम में बाबा भरत दास रोजाना सुलगते कंडों और चारों ओर जलती अग्नि के बीच बैठकर ‘नारायण-नारायण’ का जाप करते हैं। तपस्या का यह दृश्य देखने के लिए श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। तप के दौरान बाबा की शांत और स्थिर मुद्रा सभी को हैरान कर देती है।
पांच वर्षों से जारी कठोर तप
बताया जा रहा है कि यह अग्नि तप पिछले करीब पांच वर्षों से लगातार जारी है। बाबा प्रतिदिन सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक बिना किसी विचलन के इस साधना में लीन रहते हैं। भीषण गर्मी और आग की तपिश के बावजूद उनकी एकाग्रता लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।
श्रद्धालुओं में आस्था और आकर्षण
स्थानीय लोगों का कहना है कि जहां सामान्य व्यक्ति कुछ मिनट भी धूप में नहीं ठहर पाता, वहीं बाबा घंटों तक अग्नि के बीच बैठकर तप करते हैं। इस वजह से लोग उनकी साधना को गहरी आस्था और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण का प्रतीक मान रहे हैं।
शिप्रा तट पर भी चल रही साधनाएं
उज्जैन में इन दिनों धार्मिक साधनाओं का विशेष माहौल है। शिप्रा नदी के तट स्थित चक्रतीर्थ क्षेत्र में संतों द्वारा अष्टधूनी तपस्या का आयोजन भी किया जा रहा है। यह आयोजन तय अवधि तक चलेगा, जिसमें कई साधु-संत भाग ले रहे हैं।