मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले में एक सगाई समारोह उस वक्त खास बन गया जब दूल्हे पक्ष ने दहेज के तौर पर दी जा रही करीब 50 लाख रुपए की रकम और सोना लेने से साफ इनकार कर दिया। इस फैसले ने न सिर्फ समारोह में मौजूद लोगों को चौंकाया, बल्कि समाज के सामने एक मजबूत संदेश भी रखा कि शादी कोई सौदा नहीं, बल्कि रिश्तों का पवित्र बंधन है।
सगाई में दहेज लौटाकर दी मिसाल
बड़नगर तहसील के बंगरेड गांव में आयोजित तिलक समारोह में दूल्हे आदर्श दीप राजावत और उनके परिवार ने दहेज लेने से इनकार कर दिया। वधु पक्ष द्वारा 25 लाख नकद और करीब 15 तोला सोना देने की पेशकश की गई थी, जिसे सम्मानपूर्वक लौटा दिया गया।
“हमें बहू नहीं, बेटी चाहिए”
दूल्हे के पिता जितेंद्र सिंह राजावत ने साफ कहा कि उन्हें दहेज नहीं चाहिए, बल्कि बहू के रूप में बेटी चाहिए। उनका यह बयान समारोह में मौजूद लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया और सभी ने इस फैसले की सराहना की।
सिर्फ प्रतीकात्मक उपहार स्वीकार
राजावत परिवार ने नकदी और आभूषण लेने से मना कर दिया। केवल परंपरा निभाने के लिए एक सोने की अंगूठी स्वीकार की गई, जबकि बाकी सब वापस कर दिया गया। उनका मानना है कि विवाह को लेन-देन का माध्यम नहीं बनाना चाहिए।
समाज के लिए प्रेरणादायक कदम
इस पहल को समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां दहेज प्रथा गहराई से जमी हुई है, वहां इस तरह का निर्णय दूसरों को भी प्रेरित कर सकता है।
सादगी से होगा विवाह
आदर्श दीप राजावत और बिंदिया कुमारी का विवाह नवंबर 2026 में सादगीपूर्ण तरीके से किया जाएगा। दोनों परिवारों ने तय किया है कि शादी में दहेज नहीं लिया जाएगा और इसे एक सामाजिक संदेश के रूप में पेश किया जाएगा।