सावन 2025 की शुरुआत से पहले उज्जैन में हिंदू संगठनों ने एक बार फिर होटलों के बाहर संचालकों के नाम नेमप्लेट पर लिखने की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया है। संगठनों का कहना है कि कई होटल हिंदू नामों से चलाए जा रहे हैं, लेकिन उनका संचालन
मुसलमानों द्वारा किया जाता है, जिससे श्रद्धालु भ्रमित हो जाते हैं। धार्मिक भावना की रक्षा और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए नेमप्लेट लगाने की बात जोर पकड़ रही है।
श्रद्धालुओं की धार्मिक भावना से जुड़ा मामला
हर साल सावन में लाखों श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचते हैं। इस दौरान उन्हें ठहरने और भोजन की सुविधा के लिए होटलों पर निर्भर रहना पड़ता है। संगठनों का दावा है कि कई होटलों के नाम हिंदू देवी-देवताओं पर रखे गए हैं, लेकिन इनका संचालन मुसलमान करते हैं। इससे श्रद्धालु भ्रम में पड़ जाते हैं और अनजाने में मांसाहारी भोजन भी कर बैठते हैं।
नेमप्लेट नहीं लगाने पर जुर्माने की मांग
हिंदू संगठनों ने मांग की है कि सभी होटलों, ढाबों और दुकानों के बाहर मालिक या संचालक का नाम स्पष्ट रूप से नेमप्लेट पर लिखा जाए। यदि ऐसा नहीं किया गया तो जुर्माने का प्रावधान होना चाहिए। कुछ संगठनों ने तो 50 हजार रुपये तक के जुर्माने की मांग भी रखी है। उनका मानना है कि इससे पारदर्शिता बनी रहेगी और धार्मिक माहौल बिगड़ने से रोका जा सकेगा।
11 जुलाई से शुरू हो रहा है सावन
सावन का पवित्र महीना इस साल 11 जुलाई से शुरू हो रहा है। इससे पहले ही लाखों श्रद्धालु उज्जैन आने की तैयारी में हैं। इसी को देखते हुए होटल संचालन में पारदर्शिता और श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को सुरक्षित रखने की यह मांग चर्चा में बनी हुई है।