Ujjain Khade Hanuman Mandir: महाकाल की नगरी उज्जैन में मंदिरों और उनसे जुड़ी मान्यताओं की अपनी अलग पहचान है। शहर का एक करीब 170 साल पुराना मंदिर इन दिनों फिर सुर्खियों में है। सती गेट के पास स्थित खड़े हनुमान मंदिर को सड़क चौड़ीकरण के लिए दूसरी जगह स्थानांतरित करने की कोशिश की गई, लेकिन मंदिर से जुड़े लोगों के मुताबिक हनुमान जी की प्रतिमा अपनी जगह से टस से मस नहीं हुई। प्रतिमा को हटाने के लिए चार बार प्रयास किए जाने की बात कही जा रही है। इसके बाद श्रद्धालुओं के बीच इस घटना को लेकर चर्चा तेज हो गई। भक्त इसे बजरंगबली की इच्छा और उनकी अडिग शक्ति से जोड़कर देख रहे हैं। वहीं विशेषज्ञों की राय में प्रतिमा का मजबूती से स्थापित होना प्राचीन स्थापत्य तकनीक का परिणाम भी हो सकता है।
बच्चों की परेशानी दूर करने के विश्वास से मिला 'डॉक्टर हनुमान' नाम
मंदिर के पुजारी महेश बैरागी बताते हैं कि यहां लंबे समय से बच्चों को लेकर एक खास परंपरा चली आ रही है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, बच्चों की परेशानियों को दूर करने की कामना से परिवार यहां झाड़नी और ताबीज की परंपरा निभाते हैं। इसी विश्वास के चलते श्रद्धालुओं ने हनुमान जी को प्यार से 'डॉक्टर हनुमान' नाम भी दे रखा है। मंदिर से जुड़े लोगों के अनुसार, कई परिवार बच्चों से जुड़ी परेशानियों के समाधान की उम्मीद लेकर यहां मन्नत मांगने पहुंचते हैं।
धर्म की सीमाओं से परे भी पहुंचते हैं श्रद्धालु
खड़े हनुमान मंदिर की एक और खास बात यहां आने वाले श्रद्धालुओं को लेकर है। मंदिर से जुड़े लोगों का कहना है कि हिंदू परिवारों के अलावा मुस्लिम समाज के लोग भी अपनी मनोकामना लेकर यहां आते हैं। भक्त शिवेंद्र तिवारी के मुताबिक, संतान और बीमारी जैसी परेशानियों से जूझ रहे परिवार यहां मन्नत मांगते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि बजरंगबली के दरबार में सच्चे मन से की गई प्रार्थना जरूर सुनी जाती है।
सड़क चौड़ीकरण के बीच प्रतिमा हटाने की कोशिश
उज्जैन में सिंहस्थ महाकुंभ 2028 की तैयारियों के तहत कंठाल चौराहे से छत्री चौक तक सड़क को चौड़ा करने का काम जारी है। इसी मार्ग पर सती गेट के समीप यह प्राचीन मंदिर स्थित है। मंदिर को दूसरी जगह ले जाने की प्रक्रिया के तहत 4 और 5 सितंबर को प्रतिमा को हटाने के प्रयास किए गए। मंदिर से जुड़े लोगों का दावा है कि अलग-अलग तरीकों से चार बार कोशिश करने के बाद भी प्रतिमा अपने स्थान से नहीं हिली। घटना की जानकारी सामने आने के बाद श्रद्धालुओं के बीच इसे लेकर कौतूहल बढ़ गया।
1857 के आसपास स्थापना की मान्यता
स्थानीय लोगों और मंदिर से जुड़े परिवार के अनुसार, इस मंदिर का इतिहास करीब 170 साल पुराना है। मंदिर की स्थापना 1857 के आसपास होने की बात कही जाती है। पुराने दस्तावेजों में भी उस दौर से संबंधित रिकॉर्ड होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि इन दस्तावेजों और मंदिर की स्थापना से जुड़े दावों की आधिकारिक पुष्टि अलग विषय है। स्थानीय लोगों के लिए मंदिर की प्राचीनता और उससे जुड़ी परंपराएं लंबे समय से आस्था का हिस्सा रही हैं।
पांच पीढ़ियों से जारी है पूजा की परंपरा
मंदिर की देखरेख और पूजा से जुड़े महेश पंडित के परिवार के मुताबिक, उनके परिवार की कई पीढ़ियां लगातार यहां हनुमान जी की सेवा करती आई हैं। परिवार की पांचवीं पीढ़ी भी इस परंपरा को आगे बढ़ा रही है। इसी वजह से मंदिर से जुड़े परिवार के लिए यह स्थान केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि उनकी कई पीढ़ियों की विरासत और आस्था का केंद्र भी है।
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प्रतिमा नहीं हिली तो उठी दो तरह की बातें
प्रतिमा को हटाने में कथित तौर पर आई मुश्किल को लेकर अब दो तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं। श्रद्धालु इसे धार्मिक आस्था से जोड़ते हुए मानते हैं कि बजरंगबली स्वयं अपनी जगह से हटना नहीं चाहते।दूसरी ओर, विक्रम विश्वविद्यालय के पुरातत्व विशेषज्ञ प्रो. रमण सोलंकी के अनुसार, प्राचीन दौर में मंदिरों में प्रतिमाओं को बेहद मजबूत आधार पर स्थापित करने की तकनीक इस्तेमाल की जाती थी। इसलिए प्रतिमा का अपनी जगह मजबूती से टिके रहना स्थापत्य और निर्माण तकनीक से भी संबंधित हो सकता है। फिलहाल वजह चाहे आस्था से जुड़ी हो या प्राचीन निर्माण पद्धति से, उज्जैन का खड़े हनुमान मंदिर एक बार फिर लोगों की चर्चा के केंद्र में है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. loksatya इसकी पुष्टि नहीं करता है।