UJJAIN HANUMANJI: उज्जैन के खड़े हनुमानजी मंदिर को लेकर चल रहे विवाद में अब एक नया मोड़ आ गया है। सड़क चौड़ीकरण के लिए मंदिर का ढांचा हटाए जाने के बाद प्रतिमा को लेकर उठी जनभावनाओं को देखते हुए प्रशासन ने फिलहाल आगे की कार्रवाई रोक दी है। प्रतिमा की वास्तविक स्थिति और जमीन के नीचे की संरचना जानने के लिए IIT इंदौर की टीम ने वैज्ञानिक जांच की है। अब विशेषज्ञों की रिपोर्ट के बाद अगला फैसला होगा।
दो घंटे तक चली IIT की जांच
IIT इंदौर की टीम ने मंगलवार को मंदिर परिसर में करीब दो घंटे तक जांच की। विशेष उपकरणों की मदद से प्रतिमा की जमीन में गहराई, आसपास की संरचना और उसके संभावित आधार की जानकारी जुटाई गई। प्रशासन यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि प्रतिमा के नीचे क्या मौजूद है और उसे बिना नुकसान पहुंचाए हटाना संभव है या नहीं।
रिपोर्ट आने तक नहीं होगी कार्रवाई
नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा के मुताबिक, IIT इंदौर की रिपोर्ट आने के बाद ही प्रतिमा को हटाने की प्रक्रिया और तारीख को लेकर फैसला होगा। विशेषज्ञों की राय आने तक कोई आगे की कार्रवाई नहीं की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि सभी संबंधित पक्षों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए ही प्रतिमा को लेकर निर्णय लिया जाएगा।
1000 साल पुरानी होने की चर्चा
खड़े हनुमानजी की प्रतिमा की प्राचीनता ने पूरे मामले को और खास बना दिया है। पुरातत्व विशेषज्ञों के अनुसार प्रतिमा करीब 1000 वर्ष पुरानी हो सकती है। हालांकि, इसकी वास्तविक स्थिति और संरचना को लेकर विशेषज्ञों की रिपोर्ट का इंतजार है। इसी बीच श्रद्धालु प्रतिमा को यथास्थान सुरक्षित रखने की मांग कर रहे हैं।
भक्तों की आस्था बनी बड़ा मुद्दा
मंदिर के विस्थापन की खबर सामने आने के बाद बड़ी संख्या में लोग इसके समर्थन में सामने आए। श्रद्धालुओं का कहना है कि यह स्थान लंबे समय से उनकी आस्था का केंद्र रहा है। संत समाज के साथ कांग्रेस और विश्व हिंदू परिषद-बजरंग दल ने भी प्रशासन से प्रतिमा और प्राचीन स्थान को सुरक्षित रखने की मांग की है।
खड़े हनुमान को नया तीर्थ बनाने की मांग
विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ता महाकाल नीलकंठ द्वार पर एकत्र हुए और पैदल यात्रा करते हुए खड़े हनुमान मंदिर पहुंचे। संगठन के पदाधिकारियों ने दर्शन के बाद प्रशासन के सामने अपनी मांग रखी। उनका कहना है कि खड़े हनुमानजी का यह प्राचीन स्थान वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और इसे नए तीर्थ के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। अब IIT इंदौर की रिपोर्ट के बाद ही तस्वीर साफ होगी।