उज्जैन में अगले साल आयोजित होने जा रहे सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। प्रशासन ने सबसे पहले शिप्रा नदी पर भीड़ प्रबंधन को प्राथमिकता दी है। इस दिशा में करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से इंदौर रोड के तपोभूमि से मंगलनाथ मंदिर तक 12 किलोमीटर में 14 नए ब्रिज बनाए जाएंगे। इन ब्रिजों का उद्देश्य न केवल श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुगम बनाना है, बल्कि पूरे क्षेत्र का विकास भी सुनिश्चित करना है।
शिप्रा नदी पर बनने वाले नए ब्रिज और लागत
सिंहस्थ कुंभ की तैयारियों के तहत शिप्रा नदी पर 14 नए ब्रिज बनाए जाने की योजना बनाई गई है। यह परियोजना कुल मिलाकर लगभग 300 करोड़ रुपये की लागत से संचालित होगी। इनमें वीरे दुर्गादास छतरी विकास योजना के अंतर्गत कलात्मक आर्च ब्रिज, मंगलनाथ से अंगारेश्वर मंदिर तक ब्रिज (लागत: 14.56 करोड़), इंदौर रोड से चिंतामण रेलवे स्टेशन तक फोर-लेन पुल (लागत: 18.71 करोड़), हरिफाटक से रिंग रोड तक उच्च स्तरीय वाकणकर ब्रिज (लागत: 22.45 करोड़) शामिल हैं।
भीड़ प्रबंधन में बढ़ेगा सहूलियत
सिंहस्थ कुंभ मेले में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचने की संभावना है। इसलिए भीड़ प्रबंधन को लेकर प्रशासन विशेष रूप से सतर्क है। नए पुलों के निर्माण से श्रद्धालुओं के लिए शिप्रा नदी पार करना आसान होगा। साथ ही घाटों का पुनर्निर्माण किया जा रहा है ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। छोटे पुल और रपटें बनाकर लोगों की आवाजाही को और सहज बनाया जाएगा।
सड़क नेटवर्क और क्षेत्रीय विकास
इन ब्रिज परियोजनाओं के साथ ही आसपास के सड़क नेटवर्क को भी सुदृढ़ किया जा रहा है। इससे क्षेत्र का संपूर्ण विकास सुनिश्चित होगा। प्रशासन ने सुनिश्चित किया है कि ये सभी पुल सिंहस्थ से पहले समय पर तैयार हो जाएं। परियोजना के पूरा होने के बाद न केवल श्रद्धालुओं को सुविधा होगी, बल्कि शिप्रा नदी का सौंदर्य भी बढ़ेगा।
भविष्य की तैयारी
सिंहस्थ 2026 के लिए ये पुल निर्माण कार्य समयबद्ध तरीके से किए जा रहे हैं। प्रशासन ने पूर्व से ही रणनीति बनाई है ताकि कोई अव्यवस्था न हो। इस प्रोजेक्ट से उज्जैन का शहरी और धार्मिक पर्यटन क्षेत्र भी समृद्ध होगा।