धर्म और विज्ञान के अद्भुत संगम वाली नगरी उज्जैन एक बार फिर वैश्विक पहचान की ओर बढ़ती नजर आ रही है। ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ सम्मेलन में इसे काल गणना की राजधानी बनाने पर जोर दिया गया। इस मौके पर मोहन यादव और धर्मेंद्र प्रधान की मौजूदगी में साइंस सिटी सहित कई विकास परियोजनाओं की सौगात भी मिली।
काल गणना की राजधानी बनाने पर मंथन
उज्जैन में आयोजित ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ कार्यक्रम में समय और खगोल विज्ञान के महत्व पर गहन चर्चा हुई। सम्मेलन में ग्रीनविच मीन टाइम की जगह महाकाल स्टैंडर्ड टाइम की अवधारणा पर विचार किया गया। विशेषज्ञों ने उज्जैन को फिर से वैश्विक समय गणना का केंद्र बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
धर्म के साथ विज्ञान की पहचान
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि उज्जैन केवल आस्था की नगरी नहीं, बल्कि विज्ञान और खगोल अध्ययन की प्राचीन भूमि भी है। उन्होंने बताया कि यहां सदियों पहले सूर्य की छाया से समय मापने की परंपरा विकसित हुई थी और यह क्षेत्र प्राचीन काल में काल गणना का प्रमुख केंद्र रहा है।
साइंस सिटी और विकास परियोजनाओं की सौगात
कार्यक्रम के दौरान 15 करोड़ रुपए की लागत से बने साइंस सिटी का लोकार्पण किया गया। इसके साथ ही सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए करीब 701 करोड़ रुपए की लागत से 19.80 किलोमीटर लंबे 4-लेन बायपास का भूमिपूजन भी हुआ। सम्राट विक्रमादित्य हेरिटेज प्रोजेक्ट के विस्तार की भी घोषणा की गई।
सिंहस्थ-2028 को लेकर बड़ी तैयारी
सीएम ने कहा कि आने वाला सिंहस्थ-2028 उज्जैन को वैश्विक मंच पर स्थापित करने का सुनहरा अवसर होगा। अनुमान है कि इस दौरान करीब 40 करोड़ श्रद्धालु यहां पहुंचेंगे। ऐसे में शहर के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए तेजी से काम किया जा रहा है।
भारतीय समय अवधारणा पर जोर
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि भारतीय परंपरा में समय केवल गणना नहीं, बल्कि एक जीवंत अनुभूति है। उन्होंने उज्जैन, काशी और अन्य धार्मिक स्थलों को ज्ञान और विज्ञान की प्रयोगशालाएं बताते हुए कहा कि भारत आज स्पेस टेक्नोलॉजी में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है।