धर्मनगरी उज्जैन अब तकनीक और आस्था के संगम की नई मिसाल बनने जा रही है। सिंहस्थ 2028 से पहले शहर में पॉड टैक्सी सेवा शुरू होने की तैयारी चल रही है। इससे उज्जैन देश का तीसरा शहर बनेगा, जहां यह अत्याधुनिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम शुरू होगा। पॉड टैक्सी सेवा के जरिए श्रद्धालु महाकाल मंदिर से लेकर कालभैरव, मंगलनाथ और अन्य तीर्थ स्थलों तक कुछ ही मिनटों में पहुंच सकेंगे। यह प्रोजेक्ट श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक और शहर के ट्रैफिक के लिए राहत साबित होगा।
सिंहस्थ से पहले तकनीकी सौगात
उज्जैन प्रशासन ने सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए पॉड टैक्सी प्रोजेक्ट पर तेजी से काम शुरू किया है। यह सेवा शहर के प्रमुख धार्मिक स्थलों को एक ही नेटवर्क से जोड़ेगी। कलेक्टर रोशन कुमार सिंह के अनुसार, परियोजना की डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार की जा रही है और मेट्रो कंपनी के माध्यम से प्रारंभिक कार्य शुरू हो चुका है।
धार्मिक स्थलों को जोड़ेगा डेडिकेटेड ट्रैक
इस परियोजना के तहत महाकाल मंदिर, कालभैरव, मंगलनाथ और अन्य प्रमुख आश्रमों को एक विशेष ट्रैक से जोड़ा जाएगा। पॉड टैक्सी में 8 से 10 सीटें होंगी और ये स्वचालित रूप से चलेंगी। इससे भक्त बिना ट्रैफिक में फंसे कुछ ही मिनटों में एक मंदिर से दूसरे मंदिर तक जा सकेंगे।
देश का तीसरा शहर बनेगा उज्जैन
वर्तमान में भारत में यह सुविधा केवल दो जगहों — मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स और जेवर एयरपोर्ट — पर लागू की जा रही है। अब उज्जैन इस तकनीक को अपनाने वाला तीसरा शहर बनने जा रहा है। यह प्रोजेक्ट धार्मिक पर्यटन और आधुनिक परिवहन प्रणाली का उत्कृष्ट उदाहरण बनेगा।
भक्तों और पर्यटकों को मिलेगी बड़ी राहत
पॉड टैक्सी सेवा शुरू होने के बाद बाबा महाकाल के दर्शन से लेकर अन्य मंदिरों तक पहुंचना आसान और तेज होगा। ट्रैफिक कम होने से शहर का वातावरण भी स्वच्छ रहेगा। सिंहस्थ से पहले इस प्रोजेक्ट के पूरा होने पर उज्जैन आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को बड़ी सुविधा मिलेगी।