UJJAIN MASJID CASE:सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के बीच उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण को लेकर 100 साल से अधिक पुरानी शाही मस्जिद का मामला हाईकोर्ट पहुंचा था। मस्जिद के हिस्से को हटाने के लिए नगर निगम की कार्रवाई के खिलाफ दायर दोनों याचिकाओं पर बुधवार को सुनवाई हुई। इंदौर हाईकोर्ट ने दोनों याचिकाएं खारिज कर दीं। हालांकि, कोर्ट का विस्तृत आदेश अभी सामने नहीं आया है और याचिकाकर्ताओं ने अपील की बात कही है।
सड़क चौड़ीकरण के लिए कार्रवाई
सिंहस्थ-2028 को देखते हुए उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है। इसी के तहत गोपाल मंदिर सड़क पर नगर निगम मार्ग में आने वाले निर्माणों को हटाने की कार्रवाई कर रहा है। शाही मस्जिद का हिस्सा भी इसी सड़क की जद में बताया गया है। नगर निगम के भवन अधिकारी ने मस्जिद को हटाने के संबंध में नोटिस जारी किया था।
हाईकोर्ट में दाखिल हुईं दो याचिकाएं
नगर निगम के नोटिस के खिलाफ मस्जिद प्रबंधन और अन्य लोगों की ओर से इंदौर हाईकोर्ट में दो अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई थीं। एक याचिका शाही मस्जिद वक्फ पंचायत मोचियान और शाही मस्जिद इंतजामिया कमेटी की ओर से थी। दूसरी याचिका शाही मस्जिद वक्फ पंचायत मोचियान के अध्यक्ष अरशान हुसैन ने दाखिल की थी। दोनों मामलों में सरकार, नगर निगम और संबंधित विभागों को पक्षकार बनाया गया था।
100 साल से ज्यादा पुरानी होने का दावा
याचिकाकर्ताओं ने नगर निगम के नोटिस को अपूर्ण, अस्पष्ट और अवैधानिक बताते हुए आपत्ति जताई थी। मस्जिद प्रबंधन का दावा है कि शाही मस्जिद 100 वर्ष से अधिक पुरानी है और उससे जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेज भी उपलब्ध हैं। याचिका में 17 मार्च 1925 के एक पत्र और 13 सितंबर 1985 के मध्य प्रदेश शासन के राजपत्र का भी उल्लेख किया गया था।
सड़क 40 फीट चौड़ी होने की दलील
मस्जिद प्रबंधन की ओर से यह भी कहा गया कि 1975 में यातायात व्यवस्था बेहतर करने के लिए मस्जिद की ओर से स्वेच्छा से जमीन दी गई थी। प्रबंधन के मुताबिक, वर्तमान में सड़क करीब 40 फीट चौड़ी है और आवागमन में कोई बड़ी बाधा नहीं है। इसी आधार पर धार्मिक स्थल को हटाने की कार्रवाई का विरोध किया गया था।
आदेश के खिलाफ अपील की तैयारी
जस्टिस संदीप एन. भट्ट की कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद दोनों याचिकाएं खारिज कर दी गईं। हालांकि, अदालत का विस्तृत आदेश अभी जारी नहीं हुआ है। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता सैय्यद अश्हार अली वारसी ने कहा है कि वे विस्तृत आदेश का इंतजार कर रहे हैं। आदेश मिलने के बाद उसके खिलाफ अपील दाखिल करने की बात कही गई है।