UJJAIN GANESHOTSAV: उज्जैन के महाकाल मंदिर परिसर स्थित श्री सिद्धिविनायक गणेश मंदिर में गणेशोत्सव के दौरान भगवान गणेश को 5 लाख 51 हजार मोदक का महाभोग लगाया गया। भोग के बाद मंदिर पहुंचे श्रद्धालुओं के बीच मोदक का प्रसाद वितरित किया गया। इस विशेष आयोजन के दौरान राज्यसभा सांसद और संत उमेशनाथ महाराज भी मंदिर पहुंचे और भगवान सिद्धिविनायक का पूजन-अर्चन किया। इस अवसर पर उन्होंने उज्जैन की धार्मिक और आध्यात्मिक परंपरा का उल्लेख करते हुए शहर में होने वाले सिंहस्थ की तैयारियों पर भी बात की।
सिद्धिविनायक मंदिर में 5.51 लाख मोदक का भोग
श्री महाकालेश्वर मंदिर परिक्षेत्र में स्थित सिद्धिविनायक गणेश मंदिर में चल रहे 12 दिवसीय गणेशोत्सव के दौरान भगवान गणेश के लिए विशेष महाभोग का आयोजन किया गया। मंदिर में मंगलमूर्ति भगवान सिद्धिविनायक को 5 लाख 51 हजार मोदक अर्पित किए गए। बड़ी संख्या में मोदक का भोग लगाए जाने के बाद इन्हें श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद के रूप में वितरित किया गया। आयोजन के दौरान मंदिर परिसर में धार्मिक माहौल रहा और दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश के दर्शन कर प्रसाद ग्रहण किया।
संत उमेशनाथ महाराज ने किया पूजन-अर्चन
प्रदोष पर्व के अवसर पर राज्यसभा सांसद बालयोगी संत उमेशनाथ महाराज सिद्धिविनायक मंदिर पहुंचे। उन्होंने भगवान गणेश का विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया और मंदिर की धार्मिक परंपरा से जुड़े महत्व का उल्लेख किया। मीडिया से चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि उज्जैन प्राचीन धार्मिक नगरी है और सप्तपुरियों में इसका विशेष स्थान माना जाता है। उनके मुताबिक शहर के अलग-अलग देवस्थानों की अपनी धार्मिक और ऐतिहासिक मान्यताएं हैं, जिसके कारण उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यहां के मंदिरों का विशेष महत्व रहता है।
सिंहस्थ 2028 की तैयारियों का भी किया जिक्र
संत उमेशनाथ महाराज ने उज्जैन में प्रस्तावित सिंहस्थ के आयोजन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में आगामी सिंहस्थ को भव्य और दिव्य स्वरूप देने की तैयारियां चल रही हैं। शहर में बुनियादी सुविधाओं के विकास के साथ धार्मिक स्थलों और प्रमुख क्षेत्रों को भी व्यवस्थित करने का काम किया जा रहा है। सिंहस्थ के दौरान देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने की संभावना के बीच शहर में कई स्तरों पर तैयारियां की जा रही हैं।
प्राचीन मंदिर से जुड़ी हैं धार्मिक मान्यताएं
सिद्धिविनायक मंदिर के इतिहास को लेकर स्थानीय धार्मिक परंपराओं में कई मान्यताएं प्रचलित हैं। संत उमेशनाथ महाराज ने मंदिर का उल्लेख करते हुए कहा कि यह क्षेत्र पहले महाकाल वन के नाम से जाना जाता था और धार्मिक मान्यता के अनुसार सिद्धिविनायक मंदिर की स्थापना राजा भर्तृहरि से जोड़ी जाती है। मंदिर परिसर में मौजूद भगवान गणेश की प्राचीन प्रतिमा श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। हालांकि राजा भर्तृहरि से मंदिर की स्थापना जुड़ी होने की बात को धार्मिक परंपरा और मान्यता के रूप में देखा जाता है।
गणेशोत्सव में धार्मिक आयोजनों का सिलसिला
सिद्धिविनायक मंदिर में 12 दिवसीय गणेशोत्सव के दौरान अलग-अलग धार्मिक आयोजन किए जा रहे हैं। इसी क्रम में भगवान गणेश को 5.51 लाख मोदक का महाभोग लगाया गया और बाद में श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। महाकाल क्षेत्र में स्थित होने के कारण सिद्धिविनायक मंदिर भी उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में शामिल है। गणेशोत्सव के दौरान विशेष पूजन और महाभोग के आयोजन से मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण देखने को मिला।