उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ 2028 की तैयारियों ने तेजी पकड़ ली है। किसानों की लैंड पूलिंग निरस्त होने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि यह आयोजन प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश का गौरव बढ़ाने वाला है। उन्होंने कहा कि विश्व के सबसे बड़े धार्मिक मेला-आयोजन के लिए सभी व्यवस्थाएं मजबूत, टिकाऊ और भविष्य को ध्यान में रखते हुए की जाएंगी। साधु–संतों से लेकर किसानों तक, सभी हितधारकों को साथ लेकर समन्वित काम किया जाएगा।
सिंहस्थ 2028 की तैयारी तेज
उज्जैन में 2028 में होने वाले सिंहस्थ को लेकर सरकार ने सभी विभागों को तैयारी में जुटने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक स्तर पर प्रदेश बड़े परिवर्तन देखने वाला है। उन्होंने बताया कि यह आयोजन सिर्फ एक मेला नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर भारतीय संस्कृति और परंपराओं को प्रदर्शित करने का अवसर है।
किसानों की लैंड पूलिंग निरस्त, सरकार का आश्वासन
किसानों की जमीन से जुड़े मामलों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि लैंड पूलिंग को रद्द कर दिया गया है और अब किसी भी किसान को नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि किसानों के हितों को प्राथमिकता देते हुए विकास कार्य आगे बढ़ेंगे। सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि उनकी जमीन, आजीविका और अधिकार सुरक्षित रहें।
साधु–संतों के साथ मिलकर होगी कार्य योजना
आयोजन को सफल बनाने के लिए साधु–संतों को भी चर्चा में शामिल किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक परंपराओं का सम्मान करते हुए हर व्यवस्था वही बनाई जाएगी जो श्रद्धालुओं और अखाड़ों की जरूरतों को ध्यान में रखकर निर्धारित हो। आध्यात्मिकता और विज्ञान, दोनों का संतुलन इस आयोजन का विशेष आकर्षण होगा।
विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर का लक्ष्य
सरकार ने साफ किया है कि व्यवस्था और धन की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। प्रशासन ने परिवहन, सुरक्षा, आवास, स्वच्छता और नई तकनीकों के लिए योजनाएं बनानी शुरू कर दी हैं। उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में कई स्थायी विकास परियोजनाएं भी तैयार की जा रही हैं, ताकि आयोजन का लाभ आने वाले वर्षों तक मिलता रहे।