उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ महापर्व 2028 को लेकर प्रशासन ने सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की तैयारियां तेज कर दी हैं। अनुमानित 40 करोड़ श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए इस बार आधुनिक तकनीक का बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जाएगा। शिप्रा नदी के तट पर हाईटेक स्मार्ट ड्रोन का लाइव डेमो किया गया, जिसमें करीब 8 किलोमीटर तक निगरानी और रियल टाइम मॉनिटरिंग की क्षमता का प्रदर्शन किया गया।
शिप्रा तट पर हुआ हाईटेक ड्रोन का लाइव डेमो
सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत शिप्रा नदी के किनारे राणोजी की छत्री पर ड्रोन तकनीक का प्रदर्शन किया गया। इस दौरान वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौजूद रहे। चेन्नई, दिल्ली और गुरुग्राम की कंपनियों ने आधुनिक ड्रोन तकनीक का डेमो दिया। डेमो के दौरान ड्रोन ने शिप्रा नदी, घाटों, मेला क्षेत्र, प्रमुख सड़कों और आसपास की गलियों की लाइव निगरानी करके दिखाई। अधिकारियों ने ड्रोन की कैमरा क्वालिटी, उड़ान क्षमता और डेटा ट्रांसमिशन के साथ आपदा प्रबंधन में इसके इस्तेमाल की संभावनाओं को भी परखा।
8 किलोमीटर तक आसमान से नजर रखने की तैयारी
प्रशासन के अनुसार, प्रदर्शित किए गए हाईटेक ड्रोन करीब 8 किलोमीटर तक प्रभावी निगरानी करने में सक्षम हैं। ड्रोन से मिलने वाली लाइव तस्वीरें और वीडियो सीधे कंट्रोल रूम तक पहुंचाए जा सकेंगे।इस तकनीक से मेला क्षेत्र में किसी भी तरह की असामान्य स्थिति, भीड़ बढ़ने, मार्गों पर दबाव या घाटों पर संभावित अव्यवस्था की जानकारी अधिकारियों को तुरंत मिल सकेगी। इसके आधार पर जरूरत पड़ने पर मौके पर तेजी से कार्रवाई की जा सकेगी।
सिर्फ निगरानी नहीं, भीड़ और ट्रैफिक भी संभालेंगे ड्रोन
सिंहस्थ में ड्रोन का इस्तेमाल केवल निगरानी तक सीमित रखने की तैयारी नहीं है। प्रशासन के मुताबिक इनका उपयोग भीड़ प्रबंधन, ट्रैफिक कंट्रोल और आपदा राहत जैसे कार्यों में भी किया जा सकता है।ड्रोन से घाटों पर श्रद्धालुओं की संख्या, प्रमुख मार्गों पर यातायात की स्थिति और मेला क्षेत्र में भीड़ के मूवमेंट पर नजर रखी जा सकेगी। जरूरत पड़ने पर सार्वजनिक घोषणा प्रणाली के जरिए श्रद्धालुओं तक जरूरी सूचनाएं पहुंचाने में भी इनका इस्तेमाल किया जा सकता है।
कंट्रोल रूम से होगी रियल टाइम मॉनिटरिंग
सिंहस्थ 2028 में हाईटेक ड्रोन के साथ इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम और स्मार्ट मॉनिटरिंग सिस्टम को भी महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जा रहा है। ड्रोन से मिलने वाला डेटा और लाइव विजुअल कंट्रोल रूम तक पहुंचने से अधिकारियों को घटनास्थल की स्थिति का तत्काल आकलन करने में मदद मिलेगी। इससे किसी आपात स्थिति में संबंधित टीमों को तेजी से अलर्ट करने और राहत-बचाव की कार्रवाई शुरू करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
सड़क, घाट से लेकर बिजली-पानी तक तैयारियां तेज
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर सिंहस्थ 2028 को लेकर बुनियादी सुविधाओं के विस्तार का काम भी तेजी से किया जा रहा है। सड़क, पुल, घाट, पेयजल, बिजली, स्वच्छता और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने पर फोकस किया जा रहा है।प्रशासन का लक्ष्य आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रबंधन के जरिए सिंहस्थ को सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाना है। करोड़ों श्रद्धालुओं की संभावित मौजूदगी को देखते हुए तकनीक आधारित सुरक्षा व्यवस्था को आयोजन की तैयारियों में अहम स्थान दिया जा रहा है।
तकनीक से बदलेगा सिंहस्थ का सुरक्षा मॉडल
सिंहस्थ 2028 में स्मार्ट ड्रोन, इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम और रियल टाइम मॉनिटरिंग जैसी व्यवस्थाओं के जरिए सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को नई तकनीक से जोड़ने की तैयारी है। अब ड्रोन डेमो के बाद प्रशासन की अगली तैयारियों और अंतिम तकनीकी व्यवस्था पर नजर रहेगी।