उज्जैन में सिंहस्थ 2028 को लेकर तैयारियां अब तेज रफ्तार पकड़ चुकी हैं। करोड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ को व्यवस्थित तरीके से संभालने के लिए प्रशासन 37 किलोमीटर लंबा विशाल स्नान कॉरिडोर विकसित कर रहा है। क्षिप्रा नदी के घाटों से लेकर एंट्री-एग्जिट और पार्किंग व्यवस्था तक हर बिंदु पर बारीकी से काम किया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि यह दुनिया का सबसे बड़ा स्नान कॉरिडोर होगा, जहां एक दिन में करीब 5 करोड़ श्रद्धालुओं की क्षमता विकसित की जा रही है।
सुबह 6 बजे घाटों पर उतरी अफसरों की टीम
सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को लेकर प्रशासनिक अमला लगातार मैदान में सक्रिय है। सुबह 6 बजे से अधिकारियों की टीम ने शनि मंदिर से वाकणकर ब्रिज तक करीब 6 किलोमीटर क्षेत्र का पैदल निरीक्षण किया। इस दौरान घाटों की स्थिति, श्रद्धालुओं की आवाजाही और सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर पूरे क्षेत्र की मैपिंग भी की।
37 किलोमीटर लंबा बनेगा स्नान कॉरिडोर
प्रशासन के मुताबिक सिंहस्थ 2028 के लिए 29 किलोमीटर नए घाट विकसित किए जा रहे हैं। इन्हें पुराने 9 किलोमीटर घाटों से जोड़कर कुल 37 किलोमीटर लंबा स्नान क्षेत्र तैयार किया जाएगा। यह कॉरिडोर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जा रहा है, ताकि स्नान पर्वों के दौरान किसी तरह की अव्यवस्था न हो।
हर 200 मीटर पर होगी व्यवस्थाओं की मॉनिटरिंग
तैयारियों के तहत प्रशासन घाटों की लंबाई, चौड़ाई, ऊंचाई और ड्रेनेज सिस्टम का परीक्षण कर रहा है। हर 200 मीटर पर एंट्री और एग्जिट व्यवस्था की मैपिंग की जा रही है। इसके अलावा श्रद्धालु किस रास्ते से घाट तक पहुंचेंगे और किस दिशा से बाहर निकलेंगे, इसका भी अलग प्लान तैयार किया जा रहा है।
पार्किंग से घाट तक बनेगा सुगम रूट
श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए पार्किंग और मूवमेंट प्लान पर विशेष फोकस किया जा रहा है। प्रशासन ऐसा मॉडल तैयार कर रहा है, जिसमें वाहन पार्क करने के बाद श्रद्धालु सीधे निर्धारित मार्ग से घाट तक पहुंच सकें। कोशिश है कि भीड़ के दौरान कहीं भी जाम या क्रॉस मूवमेंट की स्थिति पैदा न हो।
एक दिन में 5 करोड़ श्रद्धालुओं की क्षमता
प्रशासन का अनुमान है कि प्रमुख स्नान पर्वों पर 3 से 4 करोड़ श्रद्धालु उज्जैन पहुंच सकते हैं। इसी को देखते हुए एक दिन में करीब 5 करोड़ लोगों के स्नान की क्षमता विकसित करने पर काम चल रहा है। अधिकारियों का लक्ष्य है कि श्रद्धालु 15 से 20 मिनट के भीतर व्यवस्थित तरीके से स्नान कर सुरक्षित बाहर निकल सकें।