मध्यप्रदेश की धार्मिक नगरी Ujjain में धर्मांतरण को लेकर बढ़ती चर्चाओं के बीच एक बड़ा ऐलान सामने आया है। Akhil Bharatiya Akhara Parishad के राष्ट्रीय अध्यक्ष Ravindra Puri ने कहा है कि धर्मांतरण जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए शिक्षा सबसे बड़ा माध्यम है। इसी उद्देश्य से उज्जैन में एक बड़े विश्वविद्यालय की स्थापना की योजना बनाई जा रही है, जहां गरीब और जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा और संस्कृति दोनों से जोड़ा जाएगा।
धर्मांतरण के मुद्दे पर बढ़ी चिंता
मध्यप्रदेश में बीते कुछ समय से धर्मांतरण से जुड़े कई मामले सामने आए हैं, जिन्हें सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर गंभीर चुनौती माना जा रहा है। इसी संदर्भ में उज्जैन में आयोजित एक कार्यक्रम में रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को अक्सर निशाना बनाकर धर्मांतरण के प्रयास किए जाते हैं। उनका कहना है कि समाज को इस विषय पर जागरूक होना बेहद जरूरी है।
उज्जैन में खुलेगा नया विश्वविद्यालय
रविंद्रपुरी महाराज ने घोषणा की कि उज्जैन में जल्द ही एक विशाल विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी। यह संस्थान विशेष रूप से समाज के उन बच्चों के लिए होगा, जो आर्थिक तंगी के कारण शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। विश्वविद्यालय में आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, परंपरा और आध्यात्मिक मूल्यों को भी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाएगा।
जन सहयोग से तैयार होगा शिक्षा संस्थान
अखाड़ा परिषद का कहना है कि इस विश्वविद्यालय का निर्माण जन सहयोग के माध्यम से किया जाएगा। समाज के विभिन्न वर्गों से आर्थिक और सामाजिक सहयोग लेकर इसे एक बड़े शैक्षणिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। उनका मानना है कि यदि गरीब बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी, तो वे किसी भी प्रकार के प्रलोभन या दबाव में आने से बच सकेंगे।
शिक्षा और जागरूकता को बताया समाधान
रविंद्रपुरी महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि आज के दौर में धर्मांतरण एक बड़ी सामाजिक चुनौती के रूप में सामने आ रहा है। इससे निपटने के लिए समाज को जागरूक बनाना और युवाओं को शिक्षित करना जरूरी है। उनका मानना है कि जब समाज शिक्षित और जागरूक होगा, तब किसी भी प्रकार के भ्रम या लालच के जरिए धर्म परिवर्तन की घटनाओं को रोका जा सकेगा।
समाज को जागने का दिया संदेश
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने हिंदू समाज से एकजुट होकर शिक्षा और संस्कृति के संरक्षण के लिए आगे आने की अपील की। उनका कहना था कि अगर समाज मिलकर प्रयास करे तो शिक्षा के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और परंपराओं से जोड़ा जा सकता है। यह विश्वविद्यालय उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।