मध्य प्रदेश के उज्जैन से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जहां गर्मियों की छुट्टियां मनाने आए एक परिवार की खुशियां अचानक मातम में बदल गईं। नाना के घर हंसी-खुशी जुटे दो परिवारों को यह अंदाजा भी नहीं था कि एक बंद कमरे में रखा गेहूं उनकी जिंदगी पर इतना भारी पड़ जाएगा। जहरीली गैस के कारण दो मासूम बच्चियों की जान चली गई, जिससे पूरे इलाके में शोक का माहौल है।
बंद कमरे में बना जानलेवा माहौल
घटना उज्जैन के नानाखेड़ा थाना क्षेत्र स्थित त्रिवेणी हिल्स की है। परिवार जिस कमरे में सो रहा था, वहां बड़ी मात्रा में गेहूं का स्टॉक रखा हुआ था। रातभर कमरा पूरी तरह बंद रहने के कारण अंदर जहरीली गैस बन गई, जिसका किसी को अंदाजा नहीं हुआ।
सुबह बिगड़ी तबीयत, मच गया हड़कंप
सुबह करीब 9 बजे जब परिवार के लोग जागे, तो बच्चों की हालत बेहद खराब थी। उनके मुंह से झाग निकल रहा था और सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। परिजन घबराकर तुरंत बच्चों को अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन तब तक हालत गंभीर हो चुकी थी।
दो मासूम जिंदगियां बुझीं
इस दर्दनाक हादसे में शाजापुर की डेढ़ महीने की मासूम तृषा ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। वहीं, कायथा निवासी 4 वर्षीय अनिका की भी जान नहीं बच सकी। यह घटना पूरे परिवार के लिए असहनीय दुख लेकर आई है।
गैस बनने की वजह पर जांच जारी
प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि गेहूं के संरक्षण के लिए रखी गई किसी कीटनाशक दवा के कारण जहरीली गैस बनी होगी। पुलिस मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि लापरवाही कहां हुई।
सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल
यह हादसा एक गंभीर चेतावनी है कि अनाज भंडारण और कीटनाशकों के उपयोग में सावधानी कितनी जरूरी है। बंद कमरों में इस तरह के स्टॉक रखना जानलेवा साबित हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में वेंटिलेशन और सुरक्षा उपाय बेहद जरूरी होते हैं।